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कुलगाम में प्रवासी मजदूरों की हत्या से सुरक्षा पर उठे सवाल

कुलगाम में छत्तीसगढ़ के दो प्रवासी मजदूरों की हत्या ने घाटी में गैर-स्थानीय नागरिकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह हमला सुरक्षा एजेंसियों को सतर्क कर दिया है, जिसके बाद उपराज्यपाल ने सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा के निर्देश दिए हैं। पुलिस अब प्रवासी श्रमिकों को सुरक्षित ठिकानों पर रखने की योजना बना रही है। इस घटना के बाद, प्रवासी मजदूरों में भय बढ़ा है, लेकिन अधिकांश अभी भी घाटी में रहने के पक्ष में हैं। जानें इस घटना के बाद उठाए गए सुरक्षा कदम और प्रवासी मजदूरों की स्थिति के बारे में।
 

कुलगाम में आतंकियों का हमला

दक्षिण कश्मीर के कुलगाम में छत्तीसगढ़ के दो प्रवासी ईंट-भट्ठा श्रमिकों की आतंकियों द्वारा निर्मम हत्या ने घाटी में गैर-स्थानीय नागरिकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा कर दी हैं। यह हमला अक्टूबर 2024 के बाद मौसमी प्रवासी मजदूरों पर पहला आतंकवादी हमला है, जिसने सुरक्षा बलों को सतर्क कर दिया है। घटना के तुरंत बाद, जम्मू-कश्मीर पुलिस, सेना और अर्द्धसैनिक बलों ने क्षेत्र को घेरकर व्यापक तलाशी अभियान शुरू किया। उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा के लिए उच्चस्तरीय बैठक बुलाई।


घटना का विवरण

शुक्रवार शाम को कुलगाम के किलाम गांव में लगभग 250 प्रवासी श्रमिक मौजूद थे। पुलिस के अनुसार, एक व्यक्ति मजदूरों के बीच आया, सामान्य बातचीत की और फिर नजदीक से गोली मारकर 24 वर्षीय दीपक रात्रे और 25 वर्षीय भूपेंद्र भैना की हत्या कर फरार हो गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हमलावर के पास एक बैग था और उसने पहले भरोसा जीतने की कोशिश की।


सुरक्षा उपायों में बदलाव

सूत्रों के अनुसार, पुलिस अब गैर-स्थानीय श्रमिकों को बिखरे हुए ठिकानों पर रहने के बजाय गांवों के भीतर सुरक्षित क्लस्टरों में रात बिताने की योजना बना रही है। इससे उनकी निगरानी और सुरक्षा में आसानी होगी। इसके अलावा, संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी, एरिया डॉमिनेशन, रात्रि गश्त और नाकों की संख्या बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं। पर्यटक स्थलों और अमरनाथ यात्रा मार्गों पर भी वाहन जांच और यात्रियों की तलाशी को तेज किया गया है।


उपराज्यपाल का निर्देश

उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने सुरक्षा एजेंसियों को गैर-स्थानीय श्रमिकों की सुरक्षा से संबंधित स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) की समीक्षा करने का निर्देश दिया है। उन्होंने यह भी कहा कि अन्य राज्यों से आने वाले सभी श्रमिकों का स्थानीय पुलिस और जिला प्रशासन के पास अनिवार्य पंजीकरण कराया जाए। इसके साथ ही आतंकियों के खिलाफ "सटीक और प्रभावी" अभियान तेज करने के निर्देश भी दिए गए हैं।


सुरक्षा की चुनौतियाँ

पुलिस अधिकारियों का मानना है कि घाटी में हजारों प्रवासी श्रमिक परिवारों सहित विभिन्न गांवों में फैले हुए हैं। ऐसे में प्रत्येक व्यक्ति को व्यक्तिगत सुरक्षा प्रदान करना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं है। इसलिए सुरक्षा एजेंसियां सामूहिक सुरक्षा व्यवस्था के माध्यम से जोखिम को कम करने पर जोर दे रही हैं। कई क्षेत्रों में प्रवासी श्रमिकों को रात के समय अनावश्यक आवाजाही से बचने की सलाह भी दी गई है।


हमलावरों की पहचान

जांच एजेंसियां अभी हमलावरों की पहचान नहीं कर पाई हैं, लेकिन सोशल मीडिया पर द रेजिस्टेंस फ्रंट (TRF) द्वारा जिम्मेदारी लेने वाले संदेशों की जांच की जा रही है। पुलिस का कहना है कि टीआरएफ, लश्कर-ए-तैयबा का छद्म संगठन है और हाल के वर्षों में गैर-स्थानीय नागरिकों पर हुए अधिकांश लक्षित हमलों में इसका नाम सामने आया है। सुरक्षा एजेंसियां लश्कर कमांडर लतीफ भट की संभावित भूमिका की भी जांच कर रही हैं।


प्रवासी मजदूरों की स्थिति

कुलगाम के हबलिशी और किलाम क्षेत्र में दर्जनों ईंट-भट्ठे हैं, जहां हर वर्ष बिहार, उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़ समेत उत्तर भारत के हजारों श्रमिक काम करने आते हैं। अनुमान है कि अप्रैल से अक्टूबर के बीच कश्मीर में तीन से पांच लाख तक मौसमी प्रवासी श्रमिक निर्माण, कृषि, ईंट-भट्ठों और छोटे कारोबारों में काम करते हैं। पिछले छह वर्षों में आतंकियों ने 20 से अधिक गैर-स्थानीय मजदूरों की हत्या की है। हालिया हमले से प्रवासी मजदूरों में भय बढ़ा है, लेकिन अधिकांश फिलहाल घाटी छोड़ने के पक्ष में नहीं हैं।