×

कुलगाम में आतंकवादी हमले में दो प्रवासी मजदूरों की हत्या

दक्षिण कश्मीर के कुलगाम में एक आतंकवादी हमले में दो प्रवासी श्रमिकों की हत्या हो गई। इस घटना ने सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं, जबकि राजनीतिक दलों ने इसे कायराना हरकत बताया है। उपराज्यपाल ने हमले की निंदा की और सुरक्षा बलों को कार्रवाई तेज करने के निर्देश दिए हैं। यह हमला कश्मीर में आतंकवाद की बढ़ती चुनौतियों को उजागर करता है।
 

दक्षिण कश्मीर में आतंक का नया हमला

दक्षिण कश्मीर एक बार फिर आतंकवाद की भयानक घटना का गवाह बना है। कुलगाम जिले के किलाम गांव में ईंट-भट्ठे पर काम कर रहे छत्तीसगढ़ के दो प्रवासी श्रमिकों पर शुक्रवार को आतंकियों ने नजदीक से गोलियां चलाईं। इस हमले में दीपक की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि गंभीर रूप से घायल भूपिंदर ने शनिवार सुबह श्रीनगर के शेर-ए-कश्मीर इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (SKIMS) में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। इस प्रकार, इस आतंकी हमले में मरने वालों की संख्या दो हो गई है।


सुरक्षा बलों की त्वरित कार्रवाई

हमले के तुरंत बाद, सुरक्षा बलों और जम्मू-कश्मीर पुलिस ने घटनास्थल पर पहुंचकर पूरे क्षेत्र को घेर लिया और तलाशी अभियान शुरू किया। भूपिंदर को पहले अनंतनाग के सरकारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती कराया गया था, लेकिन उसकी गंभीर स्थिति को देखते हुए उसे श्रीनगर के एसकेआईएमएस में रेफर किया गया। हालांकि, डॉक्टरों के प्रयासों के बावजूद उसकी जान नहीं बचाई जा सकी।


आतंकवाद की बढ़ती चुनौतियाँ

यह हमला कई दृष्टिकोण से चिंताजनक है। दक्षिण कश्मीर में पिछले दस दिनों में यह दूसरा बड़ा आतंकी हमला है। इससे पहले 22 जुलाई को अनंतनाग में जम्मू-कश्मीर पुलिस के एक विशेष ऑपरेशंस ग्रुप के सदस्य की भी आतंकियों ने हत्या कर दी थी। अक्टूबर 2024 के बाद यह पहला अवसर है जब आतंकियों ने प्रवासी श्रमिकों को निशाना बनाया है।


प्रवासी श्रमिकों की सुरक्षा पर सवाल

पिछले छह वर्षों के आंकड़े भी घाटी में काम कर रहे प्रवासी श्रमिकों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल उठाते हैं। इस दौरान 25 से अधिक प्रवासी श्रमिक आतंकवादी घटनाओं में अपनी जान गंवा चुके हैं। 18 अक्टूबर 2024 को बिहार के 30 वर्षीय श्रमिक अशोक चौहान की भी आतंकियों ने हत्या कर दी थी। ताजा हमला इस बात का संकेत है कि आतंकवादी संगठन फिर से आम नागरिकों और प्रवासी श्रमिकों को निशाना बनाने की रणनीति पर लौट आए हैं।


उपराज्यपाल की प्रतिक्रिया

इस घटना के बाद जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने हमले की कड़ी निंदा की और इसे कायराना हरकत बताया। उन्होंने पुलिस महानिदेशक नलिन प्रभात और अन्य वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारियों से बातचीत कर सुरक्षा बलों को आतंकियों के खिलाफ अभियान तेज करने के निर्देश दिए। उपराज्यपाल ने भरोसा दिलाया कि हमले के दोषियों को जल्द से जल्द कानून के दायरे में लाया जाएगा।


राजनीतिक दलों की निंदा

राजनीतिक दलों ने भी इस हमले की निंदा की। पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी की अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने इसे "अकल्पनीय रूप से क्रूर" और "निरर्थक हिंसा" करार दिया। उन्होंने कहा कि ये मजदूर अपने परिवार का भरण-पोषण करने के लिए सैकड़ों किलोमीटर दूर कश्मीर आए थे, लेकिन उन्हें आतंक का शिकार बना दिया गया।


सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल

नेशनल कॉन्फ्रेंस ने भी इस घटना पर चिंता जताई और कहा कि सुरक्षा व्यवस्था के दावों के बावजूद इस तरह की हत्याएं चिंताजनक हैं। पार्टी ने सवाल उठाया कि जब सुरक्षा के बड़े दावे किए जा रहे हैं, तब भी आतंकवादी आम नागरिकों को निशाना बनाने में सफल कैसे हो रहे हैं।


आतंकवाद की चुनौती

कुलगाम की यह घटना एक बार फिर इस सच्चाई को उजागर करती है कि घाटी में सुरक्षा एजेंसियों के सामने आतंकवाद की चुनौती अभी समाप्त नहीं हुई है। प्रवासी श्रमिकों और आम नागरिकों को निशाना बनाने की घटनाएं न केवल सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाती हैं, बल्कि कश्मीर में सामान्य स्थिति बहाल करने के दावों की भी परीक्षा लेती हैं। अब सुरक्षा बलों के अभियान पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य हमलावरों को जल्द से जल्द पकड़ना या समाप्त करना है।