किसानों की पदयात्रा भोपाल पहुंची, MSP पर मूंग खरीद की मांग
किसानों की पदयात्रा का भोपाल आगमन
भोपाल, 28 जुलाई: मध्यप्रदेश के नर्मदापुरम से शुरू हुई किसानों की पदयात्रा, जो न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर शत-प्रतिशत मूंग खरीद की मांग कर रही है, मंगलवार को भोपाल पहुंच गई। सैकड़ों किसान मुख्यमंत्री आवास की ओर बढ़ते हुए होशंगाबाद रोड पर वीर सावरकर सेतु के पास रोक दिए गए। इस दौरान भारी पुलिस बल तैनात किया गया था, जिसमें प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल थे।
पुलिस की कार्रवाई और किसानों की स्थिति
किसानों को रोकने के लिए कई अवरोधक लगाए गए थे और अन्य जिलों से अतिरिक्त पुलिस बल भी बुलाया गया। यह पदयात्रा संयुक्त किसान मोर्चा के नेतृत्व में निकाली गई थी, जो सोमवार को सीहोर जिले के बुधनी पहुंची थी। किसान तिरंगा लेकर ‘जय जवान, जय किसान’ और सरकार विरोधी नारे लगाते हुए आगे बढ़ रहे थे।
किसानों की प्रमुख मांगें
किसानों की मुख्य मांगों में एमएसपी पर मूंग की शत-प्रतिशत खरीद, ई-टोकन प्रणाली की समस्याओं का समाधान और समय पर उचित मूल्य पर खाद की उपलब्धता शामिल हैं। नर्मदापुरम के सेठानी घाट पर धरना प्रदर्शन और हनुमान चालीसा पाठ के बाद यह पदयात्रा शुरू हुई थी। पुलिस ने भोपाल तिराहे सहित कई स्थानों पर बैरिकेड लगाकर उन्हें रोकने का प्रयास किया।
किसानों की दृढ़ता
पुलिस ने बुधनी से भोपाल के रास्ते में किसानों को कई स्थानों पर रोकने की कोशिश की, लेकिन किसान अवरोधकों को पार करते हुए आगे बढ़ते रहे। ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में पानी और भोजन की व्यवस्था की गई है। एक प्रदर्शनकारी ने बताया कि उनके पास पांच दिन का भोजन और पानी है, और वे अपनी मांगें पूरी होने तक पीछे नहीं हटेंगे।
कमलनाथ का सरकार पर आरोप
इस बीच, पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने मुख्यमंत्री मोहन यादव को पत्र लिखकर आरोप लगाया कि सरकार की उदासीनता के कारण राज्य के मूंग उत्पादक किसान परेशान हैं। उन्होंने अधिकारियों से मूंग खरीद प्रक्रिया में तेजी लाने का आग्रह किया। कमलनाथ ने कहा कि मध्यप्रदेश देश का सबसे बड़ा मूंग उत्पादक राज्य है और केंद्र सरकार ने वर्ष 2025-26 के लिए राज्य से 4.54 लाख मीट्रिक टन मूंग खरीद का लक्ष्य निर्धारित किया है।
खरीद प्रक्रिया में कमी
उन्होंने यह भी कहा कि 16 जुलाई तक इस लक्ष्य का केवल दो प्रतिशत ही खरीदा गया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ने कहा कि इसके कारण किसानों को अपनी उपज कम कीमत पर बेचने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है और सरकार को तुरंत खरीद प्रक्रिया को तेज करना चाहिए।