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किडनी संक्रमण से जूझती पिंकी की संघर्ष की कहानी

पिंकी बैरवा की कहानी एक संघर्ष और साहस की मिसाल है। किडनी संक्रमण से जूझते हुए, वे अपने पति और दो बच्चों का पालन-पोषण कर रही हैं। बाबूलाल बैरवा एक गंभीर हादसे के बाद व्हीलचेयर पर निर्भर हैं, और पिंकी हर मौसम में पराठे का ठेला लगाकर परिवार का भरण-पोषण कर रही हैं। उनकी स्थिति और संघर्ष को जानने के लिए पढ़ें।
 

परिवार की जिम्मेदारी और स्वास्थ्य समस्याएं


जयपुर। राजस्थान के दौसा जिले के बाबूलाल बैरवा की जिंदगी एक भयानक हादसे के बाद पूरी तरह बदल गई। चार साल पहले, जब वे मिट्टी में दब गए थे, तब से उनकी स्थिति गंभीर हो गई है। अब वे व्हीलचेयर पर निर्भर हैं और खड़े होने में भी असमर्थ हैं। उनका परिवार आर्थिक संकट और स्वास्थ्य समस्याओं का सामना कर रहा है।


हादसे के बाद की स्थिति:


चार साल पहले, बाबूलाल महेन्द्रा सेज में काम कर रहे थे जब एक दुर्घटना में वे मिट्टी के ढेर में दब गए। उन्हें एलएनटी मशीन से निकाला गया, लेकिन इस हादसे ने उनकी कमर और पैरों को गंभीर नुकसान पहुंचाया। अब वे बिस्तर पर हैं और व्हीलचेयर ही उनकी एकमात्र सहारा है। इलाज के लिए परिवार जयपुर में किराए के मकान में रहने आया है, जिससे खर्च बढ़ गया है।



पत्नी की संघर्ष:


बाबूलाल की पत्नी, पिंकी बैरवा, परिवार की मुख्य कमाई करने वाली सदस्य हैं। दो छोटे बच्चों की मां होने के बावजूद, वे रोजाना सांगानेर एयरपोर्ट टर्मिनल-2 के पास पराठे का ठेला लगाती हैं। हर मौसम में, वे सड़क पर खड़े होकर परिवार का भरण-पोषण कर रही हैं। उनके हाथों में छाले पड़ जाते हैं, लेकिन वे कभी नहीं रुकतीं।


हालांकि, पिंकी को भी किडनी की गंभीर बीमारी है। डॉक्टर उन्हें आराम करने की सलाह देते हैं, लेकिन घर में कमाने वाला कोई और नहीं होने के कारण, वे मजबूरन काम करती रहती हैं। पति की देखभाल, बच्चों की पढ़ाई और घरेलू जिम्मेदारियों के बीच, वे खुद की बीमारी को भी संभाल रही हैं।


परिवार की वर्तमान स्थिति:


बाबूलाल पिछले चार साल से बिस्तर पर हैं और उन्हें नियमित दवाइयों और फिजियोथेरेपी की आवश्यकता है। उनकी पत्नी किडनी की बीमारी से जूझते हुए भी काम कर रही हैं। उनके दो नाबालिग बच्चे हैं, जिनकी पढ़ाई प्रभावित हो रही है। परिवार किराए के मकान में रह रहा है और स्थायी आय का कोई साधन नहीं है।


परिवार ने कई बार स्थानीय प्रशासन और सहायता संगठनों से मदद मांगी है, लेकिन अभी तक कोई ठोस सहायता नहीं मिली है। पिंकी कहती हैं, "मेरे पति को हादसे ने बिस्तर पर ला दिया, लेकिन मैं बच्चों के लिए लड़ रही हूं। मेरी भी तबीयत ठीक नहीं है, लेकिन मजबूरी है।"


जो भी व्यक्ति या संस्था इस परिवार की मदद करना चाहें, वे सीधे संपर्क कर सकते हैं (8824076318)। एक छोटी सी मदद भी इस परिवार के लिए बड़ी राहत ला सकती है।


आप कोड के माध्यम से भी सहायता पहुंचा सकते हैं।