कावेरी जल विवाद: कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच बढ़ता तनाव
कावेरी जल विवाद की नई परतें
कावेरी जल विवाद एक बार फिर से भारतीय राजनीति और संघीय ढांचे के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है। कर्नाटक राज्य, पानी की कमी और कमजोर मानसून का हवाला देते हुए, तमिलनाडु को जल छोड़ने से मना कर रहा है। दूसरी ओर, तमिलनाडु अपने वैधानिक हिस्से की मांग को लेकर कानूनी और राजनीतिक मोर्चों पर सक्रिय है। इस बीच, कावेरी जल विनियमन समिति (CWRC) ने दोनों राज्यों से अनुरोध किया है कि वे आपसी सहमति से एक स्थायी और वैज्ञानिक "डिस्ट्रेस-शेयरिंग फॉर्मूला" तैयार करें, ताकि संकट के समय टकराव की स्थिति से बचा जा सके।
सीडब्ल्यूआरसी की अपील
सीडब्ल्यूआरसी के अध्यक्ष विनीत गुप्ता ने तमिलनाडु की उस शिकायत को खारिज कर दिया जिसमें कहा गया था कि कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण (CWMA) और सीडब्ल्यूआरसी अस्थायी व्यवस्था के आधार पर निर्णय ले रहे हैं। उन्होंने बताया कि 2023-24 में भी दोनों संस्थाओं ने जल संकट के दौरान एक डिस्ट्रेस-शेयरिंग मैकेनिज्म तैयार किया था। गुप्ता ने सवाल किया कि यदि दोनों राज्यों के पास कोई बेहतर समाधान है, तो वे उसे समिति के समक्ष क्यों नहीं रखते।
जल प्रवाह का विश्लेषण
सीडब्ल्यूआरसी ने मौजूदा परिस्थितियों का विस्तृत वैज्ञानिक विश्लेषण करने के बाद कर्नाटक को 29 जुलाई से अगले 15 दिनों तक प्रतिदिन 3,500 क्यूसेक पानी तमिलनाडु की ओर छोड़ने का निर्देश दिया है। यह आंकड़ा वर्षा के पैटर्न, कर्नाटक के प्रमुख जलाशयों में जल प्रवाह, पिछले 30 वर्षों के औसत आंकड़ों और मौसम विभाग के इनपुट के आधार पर तय किया गया है।
कर्नाटक की प्रतिक्रिया
हालांकि, कर्नाटक सरकार ने इस आदेश को चुनौती देने का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने कहा कि राज्य 54वीं आपात बैठक में सीडब्ल्यूआरसी के आदेश के खिलाफ औपचारिक अपील करेगा। उनका तर्क है कि जब राज्य में वर्षा की कमी है, तब पानी छोड़ने का निर्देश व्यावहारिक नहीं है।
राजनीतिक वार्ता और विवाद
राजनीतिक स्तर पर विवाद बढ़ता जा रहा है। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय 3 अगस्त को बेंगलुरु जाकर मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार से मुलाकात करेंगे। तमिलनाडु सरकार का कहना है कि कर्नाटक को सामान्य से 40 प्रतिशत वर्षा मिली है, इसलिए उसे अपने हिस्से का पानी छोड़ना चाहिए। हालांकि, विपक्षी पार्टियों ने इस द्विपक्षीय वार्ता का विरोध किया है।
कर्नाटक का निमंत्रण
कर्नाटक ने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय को कावेरी बेसिन का हवाई दौरा करने का निमंत्रण दिया है, ताकि वे वहां की वास्तविक स्थिति देख सकें। मुख्यमंत्री शिवकुमार ने कहा कि राज्य सरकार हेलीकॉप्टर की व्यवस्था भी करेगी।
भविष्य की संभावनाएं
फिलहाल, सभी की नजरें सीडब्ल्यूएमए की आपात बैठक और 3 अगस्त को प्रस्तावित दोनों मुख्यमंत्रियों की मुलाकात पर टिकी हैं। यदि कानूनी लड़ाई और राजनीतिक टकराव के बीच कोई साझा वैज्ञानिक फार्मूला विकसित नहीं हुआ, तो कावेरी का यह पुराना विवाद एक बार फिर न्यायालय और केंद्र सरकार के बीच नए संघर्ष का कारण बन सकता है।