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कारगिल विजय दिवस पर राजनाथ सिंह का पाकिस्तान के प्रति स्पष्ट संदेश

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कारगिल विजय दिवस पर द्रास में आयोजित कार्यक्रम में पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर पर भारत की स्थिति को स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि भारत की ओर से पाकिस्तान के साथ बातचीत केवल इसी मुद्दे पर होगी। सिंह ने भारतीय सेना की क्षमता की सराहना की और कहा कि वर्तमान सरकार सुरक्षा के मामलों में सेना के साथ मजबूती से खड़ी है। उन्होंने कैप्टन विक्रम बत्रा को याद करते हुए भारतीय सैनिकों के साहस और देशभक्ति की प्रशंसा की।
 

रक्षा मंत्री का बयान

कारगिल विजय दिवस के अवसर पर रविवार को लद्दाख के द्रास में आयोजित समारोह में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने पाकिस्तान और राष्ट्रीय सुरक्षा के संदर्भ में केंद्र सरकार की स्थिति को स्पष्ट किया। उन्होंने शहीद जवानों को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि भारत की ओर से पाकिस्तान के साथ बातचीत केवल पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर के मुद्दे पर ही होगी, जो भारत का अभिन्न हिस्सा है और जिस पर पाकिस्तान ने अवैध कब्जा कर रखा है।




हर साल 26 जुलाई को कारगिल विजय दिवस मनाया जाता है। 1999 में भारतीय सेना ने कारगिल युद्ध में पाकिस्तान समर्थित घुसपैठियों को खदेड़कर ऐतिहासिक जीत हासिल की थी। इस दिन देशभर में शहीद सैनिकों के बलिदान को याद किया जाता है।


द्रास में अपने संबोधन में राजनाथ सिंह ने भारत और पाकिस्तान की तुलना करते हुए कहा कि भारत आज कृत्रिम बुद्धिमत्ता और आधुनिक तकनीक के बड़े डेटा केंद्र स्थापित कर रहा है, जबकि पाकिस्तान कट्टरपंथ को बढ़ावा देने वाले केंद्र बना रहा है। यह दोनों देशों की सोच और विकास की दिशा में सबसे बड़ा अंतर है।




उन्होंने हाल ही में चलाए गए ऑपरेशन सिंदूर का भी जिक्र किया, जिसमें दुनिया को स्पष्ट संदेश दिया गया कि जो लोग आतंकवाद का समर्थन करेंगे, उन्हें गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। उन्होंने कहा कि भारत अपनी सुरक्षा और संप्रभुता से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं करेगा।


राजनाथ सिंह ने भारतीय सशस्त्र बलों की क्षमता की सराहना करते हुए कहा कि पहले भी सेना सक्षम थी, लेकिन राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी थी। वर्तमान सरकार में राजनीतिक इच्छाशक्ति की कोई कमी नहीं है और सेना को आवश्यक निर्णय लेने की स्वतंत्रता दी गई है।


उन्होंने सैनिकों को संबोधित करते हुए कहा कि जब तक भारतीय जवान सीमाओं की रक्षा कर रहे हैं, तब तक कोई भी देश भारत की ओर बुरी नजर डालने का साहस नहीं कर सकता। अब वह समय बीत चुका है जब सरकारें सशस्त्र बलों को प्राथमिकता नहीं देती थीं। आज सरकार सुरक्षा से जुड़े मामलों में सेना के साथ मजबूती से खड़ी है।




अपने संबोधन के अंत में, रक्षा मंत्री ने कारगिल युद्ध के वीर अधिकारी कैप्टन विक्रम बत्रा को याद किया और उनके प्रसिद्ध नारे "ये दिल मांगे मोर" का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि यही भारतीय सैनिकों का जज्बा है और पूरी दुनिया को भारतीय सैनिकों के साहस और देशभक्ति को समझना चाहिए।