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कानपुर में प्रियांशु सुसाइड केस: परिवार की कहानी और मानसिक स्वास्थ्य पर चर्चा

कानपुर में प्रियांशु श्रीवास्तव की आत्महत्या ने उसके परिवार को झकझोर दिया है। उसकी बहन गरिमा ने बताया कि वह मानसिक तनाव में था और अपने पिता पर गंभीर आरोप लगाए हैं। इस घटना ने न केवल परिवार के रिश्तों को प्रभावित किया है, बल्कि युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य पर भी एक नई बहस छेड़ी है। जानें इस मामले की पूरी कहानी और उसके पीछे के कारण।
 

प्रियांशु की बहन का बयान


प्रियांशु श्रीवास्तव की बहन गरिमा ने कहा कि उनका भाई बहुत अच्छा इंसान था और सभी से प्यार करता था। लेकिन उस दिन वह बहुत परेशान और रो रहा था। कानपुर के बर्रा क्षेत्र में प्रियांशु की आत्महत्या ने उसके परिवार को तोड़ दिया है और यह मानसिक स्वास्थ्य के मुद्दों को उजागर कर रहा है। गरिमा के अनुसार, प्रियांशु अपनी मां और बहन के बेहद करीब था।


गरिमा ने बताया कि जब वह परीक्षा देकर लौटीं, तो उन्होंने अपने भाई को रोते हुए देखा। उन्होंने उसे फोन पर समझाने की कोशिश की। परिवार का कहना है कि प्रियांशु काम के बोझ और बकाया पैसे न मिलने के कारण मानसिक तनाव में था।


सुसाइड नोट और आरोप

पुलिस को प्रियांशु का एक सुसाइड नोट मिला है, जिसमें उसने अपने पिता राजेंद्र कुमार श्रीवास्तव पर मानसिक प्रताड़ना का आरोप लगाया है। डीसीपी ईस्ट सत्यजीत गुप्ता के अनुसार, सीसीटीवी फुटेज में प्रियांशु आत्महत्या से पहले फोन पर बात करते हुए दिखाई दे रहे हैं। पुलिस इस नोट की सत्यता और प्रियांशु के अनुभवों की जांच कर रही है।


पिता का बचाव

प्रियांशु की मां नीतू श्रीवास्तव का कहना है कि उनके पति और वह दोनों बच्चों का ध्यान रखते थे। उन्होंने कहा कि बचपन की घटनाओं में उनके पति की कोई भूमिका नहीं थी। प्रियांशु के पिता ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि वह हमेशा अपने बेटे की सुरक्षा को लेकर चिंतित रहते थे।


राजेंद्र ने बताया कि घटना वाले दिन एक छोटी सी बहस के बाद उन्होंने प्रियांशु को संस्कारों की बात करते हुए डांटा था, जिसे शायद उसने दिल पर लिया।


काम का दबाव और मानसिक स्वास्थ्य

गरिमा ने बताया कि प्रियांशु का व्यवहार हाल ही में अस्थिर हो गया था। वह कभी खुश होता, तो कभी उदास। वह एक वकील होने के साथ-साथ साइबर कैफे का काम भी देखता था। लाखों रुपये का काम करने के बावजूद उसे पैसे नहीं मिल रहे थे, जिससे वह तनाव में था।


पुलिस इसे आत्महत्या मान रही है। एसीपी आशुतोष कुमार सिंह ने कहा कि परिवार की ओर से अभी तक कोई लिखित तहरीर नहीं दी गई है। इस घटना ने पिता-पुत्र के संबंधों और युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य पर नई बहस छेड़ दी है।