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कानपुर में किडनी तस्करी का भंडाफोड़: 6 डॉक्टर गिरफ्तार

कानपुर में एक संगठित किडनी तस्करी गिरोह का भंडाफोड़ हुआ है, जिसमें 6 डॉक्टरों को गिरफ्तार किया गया है। यह गिरोह गरीब लोगों से गुर्दे निकालकर अमीरों को बेचता था। एंबुलेंस ड्राइवर शिवम अग्रवाल इस गिरोह का संचालन कर रहा था। जांच में पता चला है कि गिरोह का नेटवर्क नेपाल और अन्य राज्यों तक फैला हुआ है। पुलिस ने अस्पताल को सील कर दिया है और फरार डॉक्टरों की तलाश जारी है।
 

कानपुर में किडनी तस्करी का मामला


कानपुर समाचार: उत्तर प्रदेश के कानपुर से चिकित्सा क्षेत्र को कलंकित करने वाला एक गंभीर मामला सामने आया है। कानपुर पुलिस ने एक संगठित किडनी ट्रांसप्लांट गिरोह का पर्दाफाश किया है, जिसके संबंध नेपाल, पश्चिम बंगाल और एनसीआर तक फैले हुए हैं। यह गिरोह गरीब लोगों से कम पैसे में गुर्दे निकालकर उन्हें अमीरों को करोड़ों में बेचता था। पुलिस ने इस मामले में 6 डॉक्टरों को गिरफ्तार किया है, जिनमें से डॉ. प्रीति आहूजा, जो अहूजा नर्सिंग होम की मालिक हैं, सबसे प्रमुख हैं।


उनके पति डॉ. सुरजीत आहूजा भी इस गिरोह में शामिल थे। अन्य गिरफ्तार डॉक्टरों में डॉ. राजेश कुमार, डॉ. नरेंद्र सिंह, डॉ. रामप्रकाश कुशवाहा और डॉ. कुलदीप शामिल हैं। पुलिस का मानना है कि इन डॉक्टरों ने चिकित्सा नैतिकता को दरकिनार करते हुए अस्पताल को किडनी बाजार में बदल दिया।


एंबुलेंस ड्राइवर का काला कारोबार


इस गिरोह का संचालन एक आठवीं पास एंबुलेंस ड्राइवर, शिवम अग्रवाल, कर रहा था। वह डायलिसिस करा रहे अमीर मरीजों को गुर्दा दिलाने का लालच देता था। शिवम सोशल मीडिया के माध्यम से ऐसे गरीबों को खोजता था जिन्हें पैसों की आवश्यकता थी। वह अक्सर अमिताभ बच्चन का उदाहरण देकर डोनर्स को मानसिक रूप से तैयार करता था।


नोएडा का कनेक्शन


जांच में यह भी सामने आया है कि इस गिरोह का मुख्य खिलाड़ी नोएडा का डॉ. रोहित है। वह अपनी टीम के साथ चार्टर्ड प्लेन से लखनऊ आता था और फिर कानपुर पहुंचता था। ऑपरेशन के दौरान नर्सिंग होम का स्टाफ छुट्टी पर भेज दिया जाता था और सीसीटीवी कैमरे बंद कर दिए जाते थे।


किडनी ट्रांसप्लांट का बड़ा खेल


पुलिस कमिश्नर रघुवीर लाल के अनुसार, एक किडनी ट्रांसप्लांट का पैकेज 60 लाख से 1 करोड़ रुपये के बीच होता था, जिसमें से डोनर को केवल 8 से 10 लाख रुपये दिए जाते थे। इस गिरोह ने एक अफ्रीकी महिला का भी अवैध ट्रांसप्लांट किया था।


प्रशासनिक लापरवाही


यह धंधा न केवल अवैध था, बल्कि जानलेवा भी था। कानपुर में एक महिला की ट्रांसप्लांट के बाद मौत हो गई। प्रशासनिक स्तर पर भी लापरवाही सामने आई है। पुलिस ने आरोही अस्पताल को सील कर दिया है और फरार डॉक्टरों की तलाश जारी है।


गिरोह का नेटवर्क


पुलिस की जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि इस गिरोह का नेटवर्क कानपुर, लखनऊ, मेरठ, अलीगढ़, नोएडा, उत्तराखंड, पश्चिम बंगाल और नेपाल तक फैला हुआ है। पुलिस अब गिरोह के सदस्यों की संपत्ति कुर्क करने की तैयारी कर रही है।