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कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने संयम बरतने की सलाह दी, भाजपा सरकार के रुख का किया समर्थन

कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने भाजपा सरकार के रुख का समर्थन करते हुए संयम बरतने की सलाह दी है। उन्होंने इसे नैतिक पतन नहीं, बल्कि जिम्मेदार शासन बताया। इस बीच, कांग्रेस पार्टी केंद्र सरकार की विदेश नीति पर सवाल उठा रही है। थरूर का कहना है कि संयम हार मानने का प्रतीक नहीं है, बल्कि यह एक शक्ति है। मनीष तिवारी ने भी केंद्र सरकार के संतुलित रुख का समर्थन किया है। जानें इस पर और क्या कहा गया है।
 

कांग्रेस और भाजपा के बीच राजनीतिक बयानबाजी

कांग्रेस पार्टी अमेरिका-इजराइल-ईरान संघर्ष पर केंद्र सरकार की चुप्पी को लेकर लगातार आलोचना कर रही है। इस बीच, कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने भाजपा सरकार के दृष्टिकोण का समर्थन किया है। उन्होंने इसे नैतिक पतन नहीं, बल्कि जिम्मेदार शासन बताया। तिरुवनंतपुरम के सांसद ने कहा कि यदि उन्हें कांग्रेस को सलाह देने का मौका मिलता, तो वे संयम बरतने की सलाह देते, जैसे कि केंद्र सरकार कर रही है। थरूर ने कहा कि संयम हार मानने का प्रतीक नहीं है, बल्कि यह एक शक्ति है।


 


थरूर ने कहा कि यदि मैं कांग्रेस सरकार को सलाह दे रहा होता, तो मेरी सलाह यही होती कि संयम बनाए रखें। संयम का मतलब हार मानना नहीं है; यह एक ताकत है, जो दर्शाता है कि हम अपने हितों को समझते हैं और उनकी रक्षा के लिए तत्पर हैं। यह ध्यान देने योग्य है कि थरूर के बयान से पहले, कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी ने केंद्र सरकार की विदेश नीति पर सवाल उठाते हुए कहा था कि इससे हमारी विदेश नीति की दिशा और विश्वसनीयता पर गंभीर संदेह उत्पन्न होता है।


 


कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने भी पश्चिम एशिया में केंद्र सरकार के संतुलित रुख का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि भारत ने इस क्षेत्र में ऐतिहासिक रूप से सीमित भूमिका निभाई है और उसे रणनीतिक स्वायत्तता को प्राथमिकता देनी चाहिए। ईरान, इज़राइल और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि संकट की जटिलता को देखते हुए नई दिल्ली का सतर्क कूटनीतिक दृष्टिकोण उचित है।


 


तिवारी ने यह भी कहा कि यह क्षेत्र केवल एक युद्ध का गवाह नहीं है, बल्कि कई परस्पर विरोधी संघर्षों का भी। उन्होंने कहा कि इज़राइल और ईरान के बीच जो कुछ हो रहा है, और अमेरिका का किसी एक पक्ष का समर्थन करना, केवल मध्य पूर्व की स्थिति का मामला नहीं है। यह हमारा युद्ध नहीं है। भारत को उन भू-राजनीतिक लड़ाइयों में उलझने से बचना चाहिए जिनका उससे सीधा संबंध नहीं है।


 


संयमित रहने के महत्व पर जोर देते हुए तिवारी ने कहा कि भारत सतर्क रहकर सही कदम उठा रहा है। उन्होंने कहा कि यदि हम सतर्क हैं, तो शायद हम सही कर रहे हैं, क्योंकि रणनीतिक स्वायत्तता का यही अर्थ है - अपने हितों की रक्षा करना और सही दिशा में आगे बढ़ना। संकट की शुरुआत से ही भारत ने क्षेत्र में अपने हितों को संतुलित करते हुए संवाद और कूटनीति का आह्वान किया है।