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कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने लोकसभा में शिक्षा सुधारों पर उठाए सवाल

कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने लोकसभा में 'सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026' पर चर्चा के दौरान केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने शिक्षा प्रणाली में सुधार की कमी और पेपर लीक रोकने के लिए उठाए गए कदमों की आलोचना की। गोगोई ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भी निशाना साधते हुए कहा कि सरकार को छात्रों की समस्याओं पर ध्यान देने की आवश्यकता है। केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने इस विधेयक को छात्रों के हितों की रक्षा के लिए महत्वपूर्ण बताया।
 

लोकसभा में शिक्षा सुधारों पर बहस

केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने लोकसभा में सरकार का पक्ष रखते हुए 'सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026' पर चर्चा की। इस दौरान, कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने विपक्ष की ओर से अपनी बात रखते हुए केंद्र सरकार पर आरोप लगाया कि वह देश की शिक्षा प्रणाली को सुधारने के लिए गंभीर नहीं है। उन्होंने कहा कि सरकार शिक्षा के क्षेत्र में आवश्यक बदलाव लाने के लिए तत्पर नहीं है।


गोगोई का सरकार पर हमला

गोगोई ने पूर्व शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के बीजेपी द्वारा स्वागत की आलोचना करते हुए कहा कि ऐसा प्रतीत होता था जैसे वे पाकिस्तान के साथ युद्ध से लौटे हों। उन्होंने यह भी कहा कि प्रस्तावित कानून 'पेपर लीक माफिया' को रोकने में प्रभावी नहीं होगा। गोगोई ने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के कार्यों पर चिंता व्यक्त करते हुए सवाल उठाया कि अगर NTA में 34 अधिकारियों की स्वीकृत संख्या है, तो 47 अधिकारियों को कैसे हटाया गया।


प्रधानमंत्री पर निशाना

लोकसभा में इस विधेयक पर चर्चा करते हुए, गोगोई ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री छात्रों की समस्याओं को सुलझाने के बजाय इंस्टाग्राम रील्स पर ध्यान दे रहे हैं। गोगोई ने केंद्र सरकार की परीक्षा पेपर लीक संकट से निपटने में विफलता का आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार को सोशल मीडिया प्रचार पर ध्यान केंद्रित करने के बजाय शिक्षा प्रणाली में सुधारों को प्राथमिकता देनी चाहिए।


केंद्रीय मंत्री का पक्ष

केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने इस विधेयक की शुरुआत करते हुए कहा कि यह 2024 में बने पेपर लीक-रोधी कानून को और मजबूत करेगा। उन्होंने इसे स्वतंत्र भारत में अपनी तरह का पहला कानून बताया और कहा कि यह छात्रों के हितों की रक्षा करने और सार्वजनिक परीक्षाओं की शुचिता सुनिश्चित करने के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।