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कांग्रेस नेताओं की मायावती से मुलाकात नहीं हुई, सियासी मायने गहराते हैं

उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक महत्वपूर्ण घटना सामने आई है, जहां कांग्रेस के दलित नेता मायावती से मिलने गए लेकिन उन्हें निराशा हाथ लगी। इस मुलाकात के न होने के पीछे कई सियासी मायने छिपे हैं, जो आगामी चुनावों की रणनीति को प्रभावित कर सकते हैं। जानें इस घटना के बारे में और क्या हो सकता है आगे।
 

लखनऊ में कांग्रेस नेताओं की मायावती से मुलाकात का असफल प्रयास

उत्तर प्रदेश की राजनीति से जुड़ी एक महत्वपूर्ण घटना लखनऊ में घटित हुई है। कांग्रेस के दलित नेताओं ने मायावती से मिलने का प्रयास किया, लेकिन उन्हें निराशा हाथ लगी। यूपी कांग्रेस के दो नेता, सांसद तनुज पुनिया और अनुसूचित विभाग के अध्यक्ष राजेंद्र पाल गौतम, मायावती के निवास पर पहुंचे, लेकिन उन्हें अंदर जाने की अनुमति नहीं मिली। इस घटना के बाद, दोनों नेताओं को खाली हाथ लौटना पड़ा। अब इस घटना के राजनीतिक अर्थ निकाले जा रहे हैं।


तनुज पुनिया और राजेंद्र गौतम का मायावती से संबंध

कांग्रेस सांसद तनुज पुनिया, जो कि दलित समुदाय से हैं, दिग्गज नेता पीएल पुनिया के पुत्र हैं। जब मायावती मुख्यमंत्री थीं, तब पीएल पुनिया उनके प्रमुख सचिव रहे थे और उनके करीबी माने जाते थे। वहीं, राजेंद्र पाल गौतम, कांग्रेस के अनुसूचित विभाग के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं और वे कांशीराम के समय बसपा में शामिल थे।


कांग्रेस का मायावती के साथ गठबंधन का प्रयास

कयास लगाए जा रहे हैं कि कांग्रेस 2027 के चुनावों में मायावती को अपने साथ लाने की कोशिश कर रही है ताकि विपक्ष का एक मजबूत मोर्चा तैयार किया जा सके। पीएम मोदी और सीएम योगी की जोड़ी को चुनौती देने के लिए ये दोनों दलित नेता मायावती से मिलने गए थे, लेकिन मायावती ने उनके लिए दरवाजे नहीं खोले।


कांग्रेस नेताओं की सफाई

हालांकि, तनुज पुनिया और राजेंद्र पाल गौतम ने कहा कि वे कांग्रेस कार्यालय में मीटिंग के बाद मायावती का हालचाल पूछने गए थे, क्योंकि उनका घर नजदीक था।


2024 में भी मायावती ने गठबंधन से किया था इनकार

यह ध्यान देने योग्य है कि 2024 के लोकसभा चुनावों में भी कांग्रेस ने बसपा को इंडिया गठबंधन में शामिल करने का प्रयास किया था, लेकिन मायावती ने उस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया था।