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कांग्रेस ने मोदी सरकार पर आर्थिक चुनौतियों को लेकर उठाए सवाल

कांग्रेस ने भारतीय अर्थव्यवस्था की स्थिति को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की है, यह आरोप लगाते हुए कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को आर्थिक चुनौतियों का सामना करने के लिए नए ज्ञान की आवश्यकता है। जयराम रमेश ने कहा कि महंगाई बढ़ रही है और विकास के अनुमान घट रहे हैं। उन्होंने विदेशी निवेश में गिरावट और उपभोक्ता मांग की कमी पर भी चिंता जताई। कांग्रेस का कहना है कि बिना निजी निवेश की वृद्धि के, आर्थिक विकास को बनाए रखना संभव नहीं है। जानें इस मुद्दे पर और क्या कहा गया है।
 

कांग्रेस की चिंता: आर्थिक स्थिति पर गंभीर सवाल

कांग्रेस ने भारतीय अर्थव्यवस्था की स्थिति को लेकर चिंता व्यक्त की है, यह आरोप लगाते हुए कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भले ही चुनावों में ज्ञान के बल पर जीत हासिल कर रहे हों, लेकिन उन्हें आर्थिक समस्याओं का सामना करने के लिए नए ज्ञान की आवश्यकता है। कांग्रेस के संचार प्रभारी जयराम रमेश ने कहा कि लोगों का भारतीय अर्थव्यवस्था के प्रति नजरिया इतना नकारात्मक हो गया है कि मोदी सरकार के समर्थक भी अपनी चिंताओं को सार्वजनिक रूप से व्यक्त करने लगे हैं। उन्होंने बताया कि महंगाई के अनुमान तेजी से बढ़ रहे हैं, जबकि विकास के अनुमान में कमी आई है।


विदेशी निवेश और उपभोक्ता मांग की कमी

जयराम रमेश ने यह भी कहा कि प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) में लगातार गिरावट आ रही है और आपूर्ति श्रृंखलाओं का प्रबंधन इतना खराब हो गया है कि प्रधानमंत्री को उपभोक्ताओं से उपभोग कम करने की अपील करनी पड़ी है। उन्होंने यह भी कहा कि ये चिंताएँ नई नहीं हैं, कांग्रेस इन्हें लंबे समय से उठा रही है, जिनमें सबसे महत्वपूर्ण सुस्त निवेश माहौल है। रमेश ने प्रधानमंत्री द्वारा इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी को टॉफियां भेंट करने का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री टॉफियां बांटने और धार्मिक अपीलों में व्यस्त हैं।


आर्थिक नीति में बदलाव की आवश्यकता

उन्होंने यह भी कहा कि देश की आर्थिक स्थिति गंभीर है और हमें नीति-निर्माण में मौलिक परिवर्तन की आवश्यकता है, लेकिन मोदी सरकार के पास आत्म-प्रशंसा के अलावा कोई नया विचार नहीं है। कांग्रेस नेता ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री ज्ञानेश के माध्यम से चुनाव करा रहे हैं, जबकि उन्हें अर्थव्यवस्था के लिए नए ज्ञान की तत्काल आवश्यकता है।


निजी निवेश की कमी

रमेश ने कहा कि बिना निजी निवेश की दर में महत्वपूर्ण वृद्धि के, आर्थिक विकास को उच्च स्तर पर बनाए रखना संभव नहीं है। वास्तविक वेतन स्थिर रहने के कारण सभी आय वर्गों में उपभोग की वृद्धि बाधित हो रही है। उपभोक्ता मांग की कमी के चलते, भारतीय कंपनियों के लिए निवेश करने का कोई प्रोत्साहन नहीं है।


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