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कांग्रेस ने खरगोन हिंसा मामले में भाजपा पर उठाए सवाल

कांग्रेस ने मध्य प्रदेश के खरगोन में रामनवमी पर हुई हिंसा के मामले में सभी आरोपियों के बरी होने के बाद भाजपा पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पार्टी ने कहा है कि भाजपा शासित राज्यों में 'बुलडोजर न्याय' संविधान का अपमान है। जयराम रमेश ने मांग की है कि जिन लोगों के घर तोड़े गए, उन्हें उचित मुआवजा दिया जाए और जिम्मेदार अधिकारियों को जवाबदेह ठहराया जाए। जानें इस मामले में और क्या कहा गया है।
 

खरगोन हिंसा पर कांग्रेस का बयान

नई दिल्ली, चार अगस्त (भाषा) - कांग्रेस ने मध्य प्रदेश के खरगोन में चार साल पहले रामनवमी के दौरान हुई हिंसा के मामले में सभी आरोपियों को बरी किए जाने के बाद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर तीखा हमला किया। पार्टी ने आरोप लगाया कि भाजपा शासित राज्यों में 'बुलडोजर न्याय' के नाम पर जो कुछ हो रहा है, वह संविधान का गंभीर अपमान है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि जिन लोगों के घरों को तोड़ा गया, उन्हें उचित मुआवजा मिलना चाहिए और इस कार्रवाई के लिए जिम्मेदार अधिकारियों को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए। रमेश ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में बताया कि अप्रैल 2022 में रामनवमी जुलूस के दौरान हुई हिंसा के बाद, जिला प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई करते हुए शहर के पांच मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में 16 मकानों और 29 दुकानों को ध्वस्त कर दिया था।


उन्होंने यह भी कहा कि उस समय मध्य प्रदेश के गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने कहा था, 'जिस घर से पत्थर आए हैं, उसे ही पत्थरों का ढेर बना देंगे।' रमेश ने यह भी बताया कि जुलाई 2026 में मध्य प्रदेश के एक सत्र न्यायालय ने 2022 की रामनवमी हिंसा के मामले में सभी 11 मुस्लिम आरोपियों को बरी कर दिया। अदालत ने अपने निर्णय में कहा कि आरोपियों के खिलाफ न तो कोई विश्वसनीय साक्ष्य था और न ही कोई गवाह या विधिसम्मत जांच की गई थी। कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि अदालत द्वारा निर्दोष करार दिए जाने के बावजूद भाजपा का 'बुलडोजर न्याय' पहले ही लागू किया जा चुका था।


उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा शासित राज्यों में बुलडोजर कार्रवाइयों का मुख्य निशाना मुस्लिम समुदाय रहा है, जिनके धार्मिक स्थलों, शैक्षणिक संस्थानों और घरों को ध्वस्त किया गया है। रमेश ने इसे कानून के शासन और संविधान का गंभीर अपमान बताया और मांग की कि जिन लोगों के घर तोड़े गए, उन्हें उचित मुआवजा दिया जाए और इस कार्रवाई के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए।