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कांग्रेस ने अमेरिका-ईरान समझौते पर मोदी सरकार की विदेश नीति की आलोचना की

अमेरिका और ईरान के बीच हाल ही में हुए 14-सूत्रीय समझौते ने भारत में राजनीतिक हलचल पैदा कर दी है। कांग्रेस ने इस समझौते को लेकर मोदी सरकार की विदेश नीति पर तीखा हमला किया है, जिसमें पाकिस्तान की भूमिका को लेकर गंभीर चिंताएं व्यक्त की गई हैं। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने इस घटनाक्रम को भारत के हितों के लिए हानिकारक बताया है। जानें इस समझौते के संभावित प्रभाव और कांग्रेस की चिंताएं क्या हैं।
 

अमेरिका-ईरान समझौते पर सियासी बयानबाजी

अमेरिका और ईरान के बीच हाल ही में हस्ताक्षरित 14-सूत्रीय समझौते ने भारत में राजनीतिक चर्चाओं को तेज कर दिया है। मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस ने इस समझौते को लेकर केंद्र की नरेन्द्र मोदी सरकार की विदेश नीति पर तीखा हमला किया है। कांग्रेस का कहना है कि इस समझौते में पाकिस्तान की भूमिका मोदी सरकार के लिए एक बड़ा राजनयिक झटका है। इसके साथ ही, पार्टी ने प्रधानमंत्री मोदी के अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रति रुख को "तुष्टिकरण" करार देते हुए इसकी कड़ी आलोचना की है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक विस्तृत पोस्ट में इस घटनाक्रम को भारत के हितों के लिए हानिकारक बताया।


समझौते का प्रभाव और कांग्रेस की चिंताएं

रमेश ने अपनी पोस्ट में कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच 14 सूत्रीय इस्लामाबाद समझौता ज्ञापन अब आधिकारिक रूप से जारी किया गया है। इस समझौते का नाम इस्लामाबाद मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (एमओयू) रखने से यह स्पष्ट होता है कि पाकिस्तान की क्षेत्रीय प्रतिष्ठा और वैश्विक प्रभाव में वृद्धि हुई है। उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान वही देश है जिसे 2008 के मुंबई आतंकवादी हमलों के बाद डॉ. मनमोहन सिंह ने वैश्विक स्तर पर लगभग अलग-थलग कर दिया था। रमेश ने यह भी बताया कि यह प्रधानमंत्री मोदी की विदेश नीति के लिए एक गंभीर झटका है।


पश्चिम एशिया में पाकिस्तान की भूमिका

कांग्रेस नेता ने कहा कि पाकिस्तान अब पश्चिम एशिया की भू-राजनीतिक और सुरक्षा संरचना में पहले से कहीं अधिक गहराई से शामिल हो चुका है, जिसके भारत के लिए गंभीर और दूरगामी परिणाम हो सकते हैं। रमेश ने कहा कि यदि यह एमओयू अपनी भावना और शब्दों के अनुसार लागू होता है, तो यह एक बड़ी प्रगति होगी। लेकिन इसमें दोनों पक्षों के लिए मेमोरेंडम ऑफ मिसअंडरस्टैंडिंग (गलतफहमी का समझौता) बनने की संभावना भी है। उन्होंने कहा कि आने वाले 60 दिन अत्यंत महत्वपूर्ण होंगे।


ईरान की स्थिति और नेतन्याहू की चुनौती

रमेश ने कहा कि यह एमओयू ईरान के लिए महत्वपूर्ण और कुछ हद तक अप्रत्याशित उपलब्धियां लेकर आया है। ईरान ने अपनी दृढ़ता और सहनशक्ति का प्रदर्शन किया है। जिन जीसीसी देशों ने ईरान के जवाबी हमलों का सामना किया है, उन्होंने इस एमओयू का सतर्कता के साथ स्वागत किया है। हालांकि, वे अन्य देशों के साथ अपने संबंधों पर पुनर्विचार करेंगे। रमेश ने कहा कि यह एमओयू इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की स्पष्ट पराजय है।


मोदी की विदेश नीति पर सवाल

कांग्रेस नेता ने कहा कि मोदी की इज़राइल के प्रति अंधभक्ति हमारे देश को भारी कीमत चुकाने पर मजबूर कर रही है। उन्होंने यह भी कहा कि यह एमओयू अमेरिका के लिए एक गंभीर झटका है, जिसने इज़राइल के साथ मिलकर ईरान के खिलाफ युद्ध शुरू किया था, लेकिन वे अपने लक्ष्यों में सफल नहीं हो सके। रमेश ने कहा कि एक बार फिर सैन्य शक्ति की सीमाएं उजागर हो गई हैं। प्रधानमंत्री मोदी द्वारा ट्रंप के प्रति अपनाई जा रही तुष्टिकरण की नीति का ताज़ा उदाहरण बुधवार रात देखने को मिला, जब ट्रंप-मोदी द्विपक्षीय बैठक पर भारतीय विदेश मंत्रालय का आधिकारिक वक्तव्य जारी किया गया।