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कांग्रेस की मानसून सत्र के लिए रणनीति: सरकार को घेरने की तैयारी

कांग्रेस पार्टी आगामी मानसून सत्र में केंद्र सरकार को विभिन्न मुद्दों पर घेरने की योजना बना रही है। सोनिया गांधी के आवास पर हुई बैठक में पार्टी की रणनीति को अंतिम रूप दिया गया। मल्लिकार्जुन खरगे ने बताया कि कांग्रेस पेपर लीक, शिक्षा प्रणाली में गिरावट, और भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों पर सरकार से जवाब मांगेगी। इसके अलावा, अनुसूचित जातियों और अल्पसंख्यकों के अधिकारों की रक्षा के लिए भी आवाज उठाई जाएगी। जानें और क्या है कांग्रेस की योजना इस सत्र में।
 

कांग्रेस की तैयारी

कांग्रेस पार्टी आगामी मानसून सत्र में केंद्र सरकार को विभिन्न मुद्दों पर घेरने की योजना बना रही है। गुरुवार को सोनिया गांधी के आवास 10 जनपथ पर एक महत्वपूर्ण बैठक में पार्टी की रणनीति को अंतिम रूप दिया गया। इस बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी, संगठन महासचिव के. सी. वेणुगोपाल और राज्यसभा में मुख्य सचेतक जयराम रमेश जैसे कई वरिष्ठ नेता शामिल हुए।


मुख्य मुद्दे

बैठक के बाद, मल्लिकार्जुन खरगे ने सोशल मीडिया पर जानकारी साझा की कि पार्टी मानसून सत्र में पेपर लीक, शिक्षा प्रणाली में गिरावट, संस्थानों पर कब्जा और भ्रष्टाचार के आरोपों पर सरकार से स्पष्टीकरण मांगेगी। इसके अतिरिक्त, कांग्रेस ने राम मंदिर के चढ़ावे की कथित चोरी और 3.5 करोड़ वाहन मालिकों पर एथनॉल मिश्रण थोपने जैसे मुद्दों को प्राथमिकता देने का निर्णय लिया है। पार्टी का कहना है कि ये मुद्दे जनता के जीवन और भविष्य से जुड़े हैं।


अधिकारों की रक्षा

कांग्रेस ने स्पष्ट किया है कि वह संसद में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग और अल्पसंख्यकों के अधिकारों के लिए जोरदार आवाज उठाएगी। इसके साथ ही, महंगाई, विदेश नीति की विफलताएं, रणनीतिक गलतियां और वनों की कटाई जैसे मुद्दों पर भी चर्चा की जाएगी। सूत्रों के अनुसार, बैठक में विपक्षी दलों के साथ समन्वय और सदन में सरकार को घेरने की विशेष योजना पर भी विचार किया गया।


सत्र की तिथियां

संसद का मानसून सत्र 20 जुलाई से शुरू होकर 13 अगस्त तक चलने की संभावना है। सत्र की शुरुआत से पहले, विपक्षी गठबंधन इंडिया की एक बैठक सोमवार को प्रस्तावित है, जबकि केंद्र सरकार ने रविवार को सर्वदलीय बैठक बुलाई है। कांग्रेस का उद्देश्य इन सभी महत्वपूर्ण मुद्दों के माध्यम से सरकार की जवाबदेही सुनिश्चित करना और जनहित के विषयों पर अपनी आवाज उठाना है।