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कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे का केंद्र सरकार पर हमला, लोकतंत्र की रक्षा की मांग

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने सोमवार को कॉकरोच जनता पार्टी के विरोध प्रदर्शन के दौरान केंद्र सरकार पर तीखा हमला किया। उन्होंने संसद में अपनी बात रखने की कोशिश की, लेकिन माइक बंद कर दिए जाने का आरोप लगाया। खड़गे ने भाजपा पर लोकतंत्र खत्म करने का आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार अराजकता की ओर बढ़ रही है। उन्होंने जनता को सच्चाई बताने की आवश्यकता पर जोर दिया और सदन में चर्चा की मांग की।
 

कांग्रेस का विरोध प्रदर्शन और खड़गे का बयान

सोमवार को कॉकरोच जनता पार्टी द्वारा आयोजित विरोध प्रदर्शन और संसद चलो मार्च के दौरान पुलिस की कार्रवाई पर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला किया।




हम अपनी बात कहने कहां जाएं?


संसद परिसर में अपने विचार व्यक्त करते हुए खड़गे ने कहा, "हम देश में हो रहे अन्याय, उत्पीड़न और दबाव के मुद्दों को संसद में उठाना चाहते थे और इसके लिए समय मांगा था। लेकिन जैसे ही मैंने इस विषय पर बोलना शुरू किया, मेरा माइक बंद कर दिया गया। क्या यही लोकतंत्र है? अगर आप लोकतंत्र में चर्चा नहीं कराना चाहते और हमारी आवाज सुनना नहीं चाहते, तो हम अपनी बात कहने कहां जाएं?"




उन्होंने आगे सरकार से सवाल करते हुए कहा, "हम यह जानना चाहते हैं कि बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा के साथ क्या बातचीत हुई और उनकी आंतरिक बैठक में क्या निर्णय लिए गए? जनता को यह सच्चाई बताना बेहद जरूरी है। इसलिए हमने इस विषय पर सदन में चर्चा और गृह मंत्री के आधिकारिक बयान की मांग की थी। फ्लोर लीडर्स को इस पर बोलने का अवसर मिलना चाहिए था।"




#WATCH | Delhi: On Police action during CJP protest march yesterday, Congress president and Rajya Sabha LoP Mallikarjun Kharge says, "...We sought time to raise in Parliament the issue of injustice, oppression and pressure being unleashed. But as soon as I uttered a word, the mic… pic.twitter.com/wXJKOEGaH6

— News Media July 21, 2026




भाजपा पर लोकतंत्र खत्म करने का आरोप


खड़गे ने सरकार की कार्यशैली पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा, "सरकार लोकतंत्र को समाप्त करने की कोशिश कर रही है। अपने 60 साल के राजनीतिक अनुभव में मैंने ऐसा माहौल पहले कभी नहीं देखा। आज देश अराजकता की ओर बढ़ रहा है, लेकिन प्रधानमंत्री मोदी और गृह मंत्री इसे नियंत्रित नहीं करना चाहते और न ही संसद में कोई जवाब देना चाहते हैं। हम सरकार के इस रवैये की कड़ी निंदा करते हैं।"