कांग्रेस अध्यक्ष खरगे ने मणिकर्णिका घाट के विकास पर उठाए सवाल
मणिकर्णिका घाट के प्रस्तावित परिवर्तन पर कांग्रेस का विरोध
कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने गुरुवार को वाराणसी के मणिकर्णिका घाट के प्रस्तावित विकास कार्यों पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने इसे एक नीरस सौंदर्यीकरण और व्यवसायीकरण का प्रयास करार दिया, जो कि सदियों पुरानी धार्मिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक धरोहर को नुकसान पहुंचा रहा है। खरगे ने आरोप लगाया कि विकास के नाम पर कई मंदिरों और तीर्थ स्थलों को ध्वस्त किया जा रहा है।
खरगे ने यह भी कहा कि लाखों श्रद्धालु हर साल मोक्ष की खोज में काशी आते हैं। क्या सरकार का इरादा इन श्रद्धालुओं के साथ विश्वासघात करने का है?
खरगे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर ध्वस्त की गई मूर्तियों और बुलडोजरों की तस्वीरें साझा कीं। उन्होंने लिखा कि मणिकर्णिका घाट पर बुलडोजर चलाकर धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत को नष्ट किया जा रहा है।
उन्होंने यह भी कहा कि गुप्त काल में स्थापित और लोकमाता अहिल्याबाई होलकर द्वारा पुनर्निर्मित इस धरोहर को नष्ट करना एक गंभीर अपराध है। क्या इसका उद्देश्य प्रधानमंत्री मोदी के व्यापारिक मित्रों को लाभ पहुंचाना है? उन्होंने सवाल उठाया कि क्या धरोहर को संरक्षित करते हुए जीर्णोद्धार और सौंदर्यीकरण नहीं किया जा सकता था?
मणिकर्णिका घाट के विकास की योजना
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 7 जुलाई, 2023 को मणिकर्णिका घाट के जीर्णोद्धार और पुनर्विकास की योजना की आधारशिला रखी थी। इस परियोजना की कुल लागत लगभग 17.56 करोड़ रुपये होने का अनुमान है। नए घाट में विशेष अतिथियों के लिए बैठने की व्यवस्था, रैंप, दर्शन क्षेत्र और अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। इसके अलावा, एक लकड़ी का प्लाजा भी बनाया जाएगा, जहां शोक संतप्त लोग अंतिम संस्कार के लिए लकड़ी खरीद सकेंगे।