कश्मीर में कश्मीरी पंडित परिवार की वापसी से बढ़ी उम्मीदें और भाईचारा
उत्तर कश्मीर के हंदवाडा में एक कश्मीरी पंडित परिवार की 36 वर्षों बाद वापसी ने घाटी में उम्मीद और भाईचारे का नया संदेश दिया है। परिवार ने ‘टेस्ट एंड ट्रीट्स’ नाम से रेस्तरां खोला है, जिसमें स्थानीय समुदाय का सहयोग महत्वपूर्ण रहा है। इस कहानी के माध्यम से कश्मीरी पंडितों के पुनर्वास पर चल रही चर्चाओं और स्थानीय मुस्लिम समुदाय के समर्थन की झलक मिलती है। जानें इस परिवार की यात्रा और कश्मीर में सांस्कृतिक पुनर्जीवन की उम्मीदें।
Jun 20, 2026, 16:11 IST
कश्मीरी पंडित परिवार की हंदवाडा में वापसी
उत्तर कश्मीर के हंदवाडा कस्बे में एक कश्मीरी पंडित परिवार की वापसी ने घाटी में उम्मीद, मेलजोल और सहअस्तित्व का नया संदेश दिया है। यह परिवार 1990 में आतंकवाद के चरम दौर में कश्मीर छोड़ने को मजबूर हुआ था और अब 36 वर्षों बाद अपने पुश्तैनी घर लौट आया है। परिवार ने हंदवाडा में ‘टेस्ट एंड ट्रीट्स’ नाम से एक रेस्तरां भी खोला है। रेस्तरां की मालिक चंद्रा धर ने बताया कि अपने शहर और वहां के लोगों से गहरे भावनात्मक जुड़ाव ने उन्हें वापस लौटने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि उनका बचपन हंदवाडा में बीता है और वह कभी भी अपने लोगों से दूर नहीं रहना चाहती थीं।
स्थानीय समुदाय का समर्थन
रेस्तरां के उद्घाटन के अवसर पर चंद्रा धर ने स्थानीय मुस्लिम समुदाय के सहयोग की सराहना की। उन्होंने कहा कि लोगों के प्रेम और समर्थन के कारण ही उनका सपना साकार हो सका। रेस्तरां में लोगों की भीड़ देखकर उन्हें अपने बचपन की यादें ताजा हो गईं। सुरक्षा को लेकर उठने वाली चिंताओं को खारिज करते हुए चंद्रा धर ने कहा कि उन्हें कश्मीर में कभी असुरक्षित महसूस नहीं हुआ। उन्होंने बताया कि स्थानीय मुस्लिम समुदाय ने हमेशा उन्हें अपनाया और उनका सम्मान किया।
आकाश धर का दृष्टिकोण
चंद्रा धर के बेटे आकाश धर ने इस रेस्तरां को संघर्ष, धैर्य और एकता का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि स्थानीय लोगों ने इस व्यवसाय को स्थापित करने में महत्वपूर्ण मदद की। रेस्तरां में फास्ट फूड, ताजे जूस और शेक परोसे जाएंगे, जिसमें गुणवत्ता पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
कश्मीरी पंडितों के पुनर्वास पर चर्चा
इस परिवार की वापसी ऐसे समय में हुई है जब विस्थापित कश्मीरी पंडितों के पुनर्वास पर चर्चा फिर से तेज हो गई है। हाल ही में श्रीनगर में आयोजित एक सम्मेलन में ‘प्रागाश प्रस्ताव’ को अपनाया गया, जिसमें न्याय, सांस्कृतिक संरक्षण और कश्मीरी पंडितों की सम्मानजनक वापसी का रोडमैप पेश किया गया। यह सम्मेलन वर्ष 1990 के बाद समुदाय की सबसे महत्वपूर्ण पहलों में से एक माना गया।
सरकार की सक्रियता की आवश्यकता
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के सलाहकार नासिर असलम वानी ने कश्मीरी पंडित पुनर्वास के लिए बनी शीर्ष समिति को फिर से सक्रिय करने की मांग की है। यह समिति 2009 में गठित की गई थी, लेकिन 2014 में भंग कर दी गई थी। वानी ने कहा कि केवल सम्मेलन आयोजित करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि सरकार और समाज को मिलकर गंभीर बातचीत करनी होगी ताकि कश्मीरी पंडितों की सम्मानजनक वापसी का रास्ता तैयार किया जा सके।
भाजपा की पहल
भाजपा की कश्मीर विस्थापित जिला इकाई ने घाटी के विभिन्न जिलों के प्रशासन के साथ बैठकें कर कश्मीरी पंडितों की संपत्तियों पर हुए अतिक्रमण हटाने और विस्थापित समुदाय के कर्मचारियों के लिए अलग से शिकायत निवारण शिविर लगाने की मांग की है। जिला प्रशासन ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वासन दिया कि ऐसा शिविर जल्द ही लगाया जाएगा। हंदवाडा लौटे इस परिवार की कहानी केवल एक परिवार की वापसी नहीं, बल्कि कश्मीर में भाईचारे, भरोसे और साझा संस्कृति के पुनर्जीवन की उम्मीद भी मानी जा रही है।