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कलकत्ता हाईकोर्ट का महत्वपूर्ण फैसला: लिव-इन रिलेशनशिप में रेप के आरोप नहीं मान्य

कलकत्ता हाईकोर्ट ने लिव-इन रिलेशनशिप में रेप के आरोपों को खारिज करते हुए एक महत्वपूर्ण निर्णय सुनाया है। कोर्ट ने कहा कि यदि दो लोग पति-पत्नी की तरह रहते हैं और बाद में अलग हो जाते हैं, तो उन पर रेप का आरोप नहीं लगाया जा सकता। इस मामले में एक महिला ने आरोप लगाया था कि उसके साथी ने शादी का वादा किया था, लेकिन बाद में मुकर गया। जानें इस मामले की पूरी जानकारी और कोर्ट के विचार।
 

लिव-इन रिलेशनशिप का बढ़ता चलन


भारत में लिव-इन रिलेशनशिप तेजी से सामान्य होती जा रही है। अब यह कोई रहस्य नहीं रह गया है कि युवा पीढ़ी शादी से पहले एक साथ रहने और शारीरिक संबंध बनाने को प्राथमिकता दे रही है। हालांकि, जब ये रिश्ते टूटते हैं, तो कई बार गंभीर समस्याएं उत्पन्न होती हैं, जिसमें रेप के आरोप भी शामिल होते हैं। इसी संदर्भ में कलकत्ता हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय सुनाया है।


कोर्ट का निर्णय

कलकत्ता हाईकोर्ट की जस्टिस चैताली चटर्जी की एकल पीठ ने इस मामले में एक महत्वपूर्ण चेतावनी दी। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि दो लोग पति-पत्नी की तरह रहते हैं और बाद में किसी कारणवश अलग हो जाते हैं, तो उन पर रेप का आरोप नहीं लगाया जा सकता। कोर्ट ने कहा कि सहमति से बनाए गए शारीरिक संबंध, जो शादी के वादे पर आधारित हैं, को रेप नहीं माना जा सकता।


महिला की याचिका

एक महिला ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की, जिसमें उसने आरोप लगाया कि एक व्यक्ति ने 2017 से 2022 तक उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए और शादी का वादा किया, लेकिन अब वह शादी से मुकर रहा है। महिला ने यह भी कहा कि गर्भवती होने पर उसके साथ जबरन गर्भपात कराया गया। इस मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणियां कीं।


कोर्ट की टिप्पणियां

महिला ने आरोप लगाया कि उसे शादी का झांसा देकर रेप किया गया। लेकिन कोर्ट ने कहा कि दोनों ने 5 साल तक एक साथ समय बिताया, यात्रा की और शारीरिक संबंध बनाए। कोर्ट ने सवाल उठाया कि यदि धोखा देने का इरादा था, तो वे 5 साल तक एक साथ कैसे रह सकते थे। इसे धोखे का वादा नहीं माना जा सकता।


कोर्ट ने यह भी पाया कि गर्भपात के समय महिला ने अपनी मर्जी से दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए थे। कलकत्ता हाईकोर्ट ने कहा कि लंबे समय तक शारीरिक संबंध बनाने के बाद यदि रिश्ता टूटता है या शादी नहीं होती है, तो रेप का आरोप लगाना और उसे मानना कानून का दुरुपयोग है।


अंतिम निर्णय

महिला की याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने युवक के खिलाफ सभी आरोपों को खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि जब दो वयस्क सहमति से एक साथ रहते हैं और पति-पत्नी की तरह व्यवहार करते हैं, तो बाद में किसी कारणवश अलग होने पर रेप के आरोप को मान्यता नहीं दी जा सकती।