कलकत्ता उच्च न्यायालय ने अभिषेक बनर्जी को दी राहत, जांच में सहयोग का निर्देश
अभिषेक बनर्जी को मिली राहत
कलकत्ता उच्च न्यायालय ने तृणमूल कांग्रेस के सांसद अभिषेक बनर्जी को एक महत्वपूर्ण राहत प्रदान की है। न्यायालय ने पश्चिम बंगाल पुलिस को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ चुनावी रैलियों में बनर्जी के कथित बयानों के संबंध में किसी भी दंडात्मक कार्रवाई से रोक दिया है। हालांकि, न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि बनर्जी को बिना अनुमति देश छोड़ने की अनुमति नहीं होगी और उन्हें जांच में पूरा सहयोग करना होगा।
जांच प्रक्रिया के निर्देश
न्यायालय ने यह भी निर्देश दिया कि यदि जांच एजेंसी टीएमसी सांसद को पूछताछ के लिए बुलाना चाहती है, तो उसे कम से कम 48 घंटे पहले नोटिस देना होगा। न्यायमूर्ति सौगता भट्टाचार्य ने बनर्जी को जांच में सहयोग करने और नोटिस का पालन करने का आदेश दिया। इसके साथ ही, उन्हें विदेश यात्रा करने से भी रोका गया है।
बनर्जी की याचिका और न्यायालय की टिप्पणियाँ
डायमंड हार्बर से सांसद ने 27 अप्रैल को एक सार्वजनिक सभा में प्रतिद्वंद्वी पार्टी के नेताओं के खिलाफ की गई टिप्पणियों को लेकर एफआईआर को रद्द करने के लिए उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी। न्यायमूर्ति भट्टाचार्य ने बनर्जी के बयानों पर सवाल उठाते हुए कहा कि अगर टीएमसी चुनाव जीत जाती तो क्या होता। उन्होंने राज्य में चुनाव के बाद की हिंसा के इतिहास पर भी चिंता व्यक्त की।
अगली सुनवाई की तारीख
न्यायालय ने बनर्जी को 31 जुलाई तक दंडात्मक कार्रवाई से सुरक्षा प्रदान की है और मामले की अगली सुनवाई 20 जुलाई को होगी। पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता राजदीप मजूमदार ने बनर्जी की याचिका का विरोध किया, लेकिन उन्होंने कहा कि जांच उचित प्रक्रिया के अनुसार की जाएगी।
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