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कर्नाटक विधान परिषद चुनाव 2026: कांग्रेस ने जीती 5 सीटें, BJP-JD(S) में असहमति

कर्नाटक विधान परिषद चुनाव 2026 में कांग्रेस ने 5 सीटें जीतकर अपनी स्थिति को मजबूत किया है, जबकि BJP और JD(S) के बीच असहमति बढ़ गई है। इस चुनाव ने सत्ताधारी पार्टी के लिए महत्वपूर्ण राजनीतिक परीक्षा का काम किया। कांग्रेस के उम्मीदवारों ने अपेक्षा से अधिक वोट प्राप्त किए, जिससे विपक्षी गठबंधन की एकता पर सवाल उठे हैं। जानें इस चुनाव के परिणाम और इसके राजनीतिक महत्व के बारे में।
 

कर्नाटक की राजनीति में नया मोड़

कर्नाटक की राजनीतिक स्थिति में एक बार फिर से महत्वपूर्ण बदलाव आया है। हाल ही में संपन्न विधान परिषद (MLC) चुनाव 2026 के परिणामों ने सत्तारूढ़ कांग्रेस के लिए जश्न का माहौल बना दिया है, जबकि विपक्षी भारतीय जनता पार्टी (BJP) और जनता दल (सेक्युलर) (JD(S)) के लिए कई कठिन सवाल खड़े कर दिए हैं। इस चुनाव में कांग्रेस ने 8 में से 5 सीटें जीतकर विपक्षी गठबंधन की एकता को चुनौती दी है।


कांग्रेस की जीत का विश्लेषण

कांग्रेस को अपने पांच उम्मीदवारों की जीत सुनिश्चित करने के लिए 140 पहली पसंद के वोटों की आवश्यकता थी। लेकिन जब वोटों की गिनती हुई, तो पार्टी के उम्मीदवारों को 151 पहली पसंद के वोट मिले। यह 11 वोटों की बढ़त इस बात का संकेत है कि चुनाव के दौरान BJP और JD(S) के कुछ विधायकों ने पार्टी के खिलाफ जाकर वोट दिया। चूंकि मतदान गुप्त था, इसलिए दोनों पार्टियों को यह पता लगाने में समय लगेगा कि किसने पार्टी के आधिकारिक रुख का उल्लंघन किया।


BJP और JD(S) की स्थिति

BJP के नेताओं का मानना है कि पार्टी से निकाले गए विधायकों ST सोमशेखर और शिवराम हेब्बार के अलावा, कुछ अन्य विधायकों ने भी कांग्रेस के उम्मीदवारों का समर्थन किया। वहीं, JD(S) के भीतर क्रॉस-वोटिंग के स्तर को लेकर मतभेद हैं। कुछ BJP नेताओं का मानना है कि JD(S) के कई विधायकों ने भी कांग्रेस का समर्थन किया, जबकि JD(S) के नेता यह दावा करते हैं कि उनके उम्मीदवार गोविंद राजू को 14 वोट मिले, जिससे यह स्पष्ट होता है कि बहुत कम विधायकों ने क्रॉस-वोटिंग की।


कांग्रेस की स्थिति में मजबूती

कांग्रेस के उम्मीदवार विनय कार्तिक, टिप्पन्नाप्पा कामाकानूर, बीएस शिवन्ना, बीके हरिप्रसाद और पीवी मोहन सभी विधान परिषद के लिए चुने गए हैं। इन जीतों के साथ, कांग्रेस ने 75 सदस्यों वाली विधान परिषद में अपनी स्थिति को मजबूत किया है, जिससे सत्ताधारी पार्टी के लिए महत्वपूर्ण कानून पारित करना आसान हो जाएगा।


वोटों का अंतिम आंकड़ा

विनय कार्तिक (कांग्रेस) – 32 वोट


टिप्पन्नाप्पा कामाकानूर (कांग्रेस) – 30 वोट


बी.एस. शिवन्ना (कांग्रेस) – 30 वोट


बी.के. हरिप्रसाद (कांग्रेस) – 30 वोट


पी.वी. मोहन (कांग्रेस) – 29 वोट


रघु कौटिल्य (बीजेपी) – 29 वोट


लिंगराज पाटिल (बीजेपी) – 27 वोट


गोविंद राजू (जेडी(एस)) – 14 वोट


कर्नाटक MLC चुनाव 2026 का महत्व

कर्नाटक विधान परिषद चुनाव में सभी 222 योग्य विधायकों ने वोट डाला, जिससे मतदान 100% रहा। ऊपरी सदन की सात खाली सीटों के लिए सदस्यों का चुनाव 18 जून को बेंगलुरु के विधान सौधा में सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक हुआ। चुनाव में कुल आठ उम्मीदवार थे और आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली के तहत सीट जीतने के लिए हर उम्मीदवार को कम से कम 28 वोटों की आवश्यकता थी।


यह चुनाव सात मौजूदा MLC के रिटायर होने से पहले कराया गया, जिनका कार्यकाल 30 जून को समाप्त हो रहा है। रिटायर होने वाले सदस्यों में कांग्रेस नेता गोविंदराजू, नसीर अहमद, टिप्पन्नाप्पा और बी.के. हरिप्रसाद के साथ-साथ बीजेपी सदस्य एमटीबी नागराज, प्रताप सिम्हा नायक और सुनील वल्लयापुर शामिल हैं।


चुनाव से पहले, सात में से चार सीटों पर कांग्रेस का कब्ज़ा था, जबकि बीजेपी के पास दो और जेडी(एस) के पास एक सीट थी। ताज़ा नतीजों के बाद, कांग्रेस ने विधान परिषद में अपनी ताकत को और मजबूत किया है, जिससे ऊपरी सदन में सत्ताधारी पार्टी की स्थिति और मज़बूत हो गई है।


इस चुनाव का राजनीतिक महत्व भी बहुत अधिक था, क्योंकि इसे कर्नाटक में सत्ताधारी कांग्रेस नेतृत्व और डिप्टी सीएम डी.के. शिवकुमार के लिए पहली बड़ी राजनीतिक परीक्षाओं में से एक माना जा रहा था।