कर्नाटक कांग्रेस में मुख्यमंत्री पद को लेकर बढ़ता तनाव
मुख्यमंत्री पद के लिए संघर्ष
कर्नाटक में कांग्रेस पार्टी के भीतर मुख्यमंत्री पद को लेकर तनाव अपने चरम पर पहुँच गया है। सूत्रों के अनुसार, उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार को मुख्यमंत्री बनाने की मांग को लेकर कई विधायक दिल्ली जाने की योजना बना रहे थे। उनका उद्देश्य आलाकमान से मिलकर सिद्धारमैया की जगह शिवकुमार को सीएम बनवाने का दबाव बनाना था।
डीके शिवकुमार का हस्तक्षेप
हालांकि, डीके शिवकुमार ने इन विधायकों को रोकने का निर्णय लिया। शुक्रवार को उन्होंने विधायकों से अनुरोध किया कि वे उनके नाम पर दिल्ली न जाएं। शिवकुमार ने कहा कि पार्टी आलाकमान के साथ इस मुद्दे पर पहले ही चर्चा हो चुकी है और उन्होंने अनुशासन बनाए रखने की अपील की।
सिद्धारमैया और शिवकुमार के बीच खींचतान
यह घटना कर्नाटक कांग्रेस में सिद्धारमैया और शिवकुमार के बीच चल रही खींचतान को और उजागर करती है। हाल ही में बेंगलुरु में 30 विधायकों की एक बैठक हुई थी, जिसमें शिवकुमार के समर्थकों ने रणनीति पर चर्चा की थी।
पार्टी के सूत्रों का कहना है कि शिवकुमार नहीं चाहते कि उनकी तरफ से कोई अनियंत्रित कदम उठे, जिससे आलाकमान नाराज हो। सभी की नजरें अब इस बात पर हैं कि दिल्ली से क्या निर्णय आता है।
विस्तृत जानकारी
कर्नाटक में कांग्रेस सरकार के भीतर मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के बीच मुख्यमंत्री पद को लेकर तनाव बढ़ता जा रहा है। हाल ही में, शिवकुमार के समर्थक विधायकों ने दिल्ली कांग्रेस हाईकमान के पास जाने की योजना बनाई थी। उनका उद्देश्य आलाकमान से मिलकर सिद्धारमैया की जगह डीके शिवकुमार को मुख्यमंत्री बनाने का दबाव बनाना था।
यह सब तब शुरू हुआ जब बेंगलुरु में एक निजी होटल में शिवकुमार समर्थक विधायकों की बैठक हुई, जिसे MLA एचसी बालकृष्ण के जन्मदिन पार्टी के बहाने आयोजित किया गया था। बैठक में सत्ता परिवर्तन और दिल्ली में लॉबिंग की रणनीति पर चर्चा हुई।
डीके शिवकुमार का स्पष्ट संदेश
डीके शिवकुमार ने मीडिया से कहा:
- “मेरे नाम पर दिल्ली जाने की कोई जरूरत नहीं है।”
- “मैं अपील करता हूं कि कोई भी मेरे लिए लॉबिंग करने दिल्ली न जाए।”
- “अगर किसी के पास व्यक्तिगत अनुरोध हैं या कैबिनेट में जगह की इच्छा है, तो जा सकते हैं, लेकिन मेरे लिए नहीं।”
- “यह कोई ताकत दिखाने की बात नहीं है। विधायक दिल्ली जाते हैं, विदेश जाते हैं, डिनर पार्टियों में शामिल होते हैं – ये व्यक्तिगत मामले हैं, पार्टी से जुड़े नहीं।”
शिवकुमार ने जोर देकर कहा कि पार्टी अनुशासन बनाए रखना चाहिए और हाईकमान पर निर्णय छोड़ देना चाहिए। उन्होंने कहा कि वे पार्टी अध्यक्ष के रूप में हाईकमान को जानकारी देते रहते हैं, लेकिन किसी भी अनियंत्रित कदम से बचना चाहते हैं।
पृष्ठभूमि
- कांग्रेस में पहले से 50-50 फॉर्मूला (सिद्धारमैया 2.5 साल, फिर शिवकुमार) की चर्चा है, लेकिन सिद्धारमैया पूरा कार्यकाल चाहते हैं।
- शिवकुमार समर्थक दावा करते हैं कि उनके पास 80-90 विधायक हैं।
- हाल ही में दिल्ली में शिवकुमार की सोनिया गांधी से मुलाकात और अन्य हलचलें भी हुईं।
- सिद्धारमैया कैंप अब दलित CM की बात कर रहा है ताकि शिवकुमार को काउंटर किया जा सके।