करवा चौथ 2026: पूजा के लिए मिट्टी या स्टील का करवा चुनें?
करवा चौथ का महत्व
इस वर्ष, सुहागिनों का विशेष पर्व करवा चौथ 29 अक्टूबर 2026 को मनाया जाएगा। यह व्रत पति-पत्नी के रिश्ते में संतुलन, खुशहाली और दीर्घायु की कामना के लिए किया जाता है। इस पर्व का सुहागिनों के जीवन में एक महत्वपूर्ण स्थान है। पूजा के दौरान महिलाएं अक्सर यह सोचती हैं कि मिट्टी के करवे का उपयोग करें या स्टील के। आइए जानते हैं कि वास्तु और ज्योतिष के अनुसार किस प्रकार का करवा अधिक लाभकारी है।
मिट्टी के करवे का महत्व
विशेषज्ञों के अनुसार, करवा चौथ के व्रत में मिट्टी के करवे से पूजा करना और चंद्रमा को अर्घ्य देना सबसे श्रेष्ठ माना जाता है। 'करवा' का अर्थ है मिट्टी का छोटा घड़ा, जो पृथ्वी तत्व का प्रतीक है।
वास्तु के अनुसार, मिट्टी का स्वभाव जीवन में स्थिरता और मजबूती लाने वाला होता है। इसलिए, मिट्टी के करवे से पूजा करने से दांपत्य जीवन में स्थिरता आती है। पौराणिक कथाओं में भी माता सीता और महारानी द्रौपदी ने अपने वैवाहिक जीवन में प्रेम और स्थिरता बनाए रखने के लिए मिट्टी के करवे का उपयोग किया था।
स्टील और अन्य धातुओं का उपयोग
हाल के समय में स्टील, पीतल और अन्य धातुओं के करवे का चलन बढ़ा है, लेकिन वास्तु के अनुसार प्लास्टिक, स्टील या लोहे के बर्तनों से पूजा करना वर्जित है, क्योंकि ये नकारात्मकता को बढ़ा सकते हैं। यदि मिट्टी का करवा उपलब्ध नहीं है, तो केवल तांबे या पीतल के बर्तन का उपयोग किया जा सकता है।
पूजा के बाद पुराने मिट्टी के करवे को घर में रखना वर्जित है।
करवे का विसर्जन
शास्त्रों के अनुसार, हर साल नए मिट्टी के करवे का उपयोग करना चाहिए। व्रत के अगले दिन करवे का विसर्जन किसी पवित्र नदी या बहते जल में करना चाहिए। यदि जल स्रोत उपलब्ध नहीं है, तो इसे किसी पवित्र पेड़ जैसे पीपल या बरगद की छांव में रखना चाहिए।
इसके अलावा, करवे में रखे अनाज के कुछ दानों को अपनी तिजोरी में रखने से साल भर बरकत बनी रहती है।