करनाल के विनय नरवाल: एक शहीद की कहानी और परिवार का दर्द
समय का ठहराव: विनय नरवाल का परिवार
कहा जाता है कि समय घावों को भर देता है, लेकिन करनाल के नरवाल परिवार के लिए 22 अप्रैल, 2025 की वह दुखद दोपहर आज भी ताजा है। पहलगाम में हुए आतंकी हमले को एक साल हो चुका है, लेकिन शहीद लेफ्टिनेंट विनय नरवाल के घर की खामोशी सब कुछ बयां कर देती है।
सपनों का अंत: हनीमून से त्रासदी तक
एक युवा नौसेना अधिकारी, जिसकी आंखों में देश सेवा के सपने थे, 16 अप्रैल को शादी के बंधन में बंधा। कुछ ही दिनों बाद, वह अपनी पत्नी हिमांशी के साथ हनीमून पर कश्मीर गया। लेकिन 22 अप्रैल को पहलगाम की वादियों में गोलियों की आवाज ने उनके सुनहरे भविष्य को हमेशा के लिए छीन लिया। विनय के पिता, राजेश नरवाल, ने कहा, "शादी के रिसेप्शन के तीन दिन बाद, सब कुछ खत्म हो गया। ऐसा लगा जैसे दुखों का पहाड़ टूट पड़ा।"
'जी तो रहे हैं, लेकिन जिंदगी चली गई'
करनाल में अपने घर पर बैठे विनय के पिता, राजेश नरवाल, अपने दुःख को शब्दों में व्यक्त करने में कठिनाई महसूस कर रहे हैं। उन्होंने कहा, "उस दिन के बाद सब कुछ बदल गया। हम जी रहे हैं क्योंकि जीना है, लेकिन सच यह है कि उस दिन हमारी जिंदगी खत्म हो गई।" उनके शब्दों में गुस्सा नहीं, बल्कि गहरा दुख है।
योजनाओं से भरा जीवन, छोटा सा सफर
राजेश को एक नोटबुक याद है जिसमें विनय ने अपने सपने और करियर के लक्ष्य लिखे थे। उन्होंने कहा, "विनय बहुत कम उम्र में अधिकारी बन गया था। वह जानता था कि उसे क्या चाहिए।" राजेश ने कहा, "वह दूसरों की समस्याओं को अपनी समस्याएं मानता था।"
शादी की ख़ुशी से अकल्पनीय दुःख तक
हमले से कुछ दिन पहले, नरवाल का घर जश्न से भरा था। 16 अप्रैल को विनय की शादी हुई थी, और कुछ ही दिनों में वह हनीमून पर चला गया। लेकिन शादी के रिसेप्शन के तीन दिन बाद सब कुछ खत्म हो गया।
देश की सेवा का सपना
विनय ने हमेशा वर्दी पहनने का सपना देखा था। उनके परिवार के सदस्यों से प्रेरित होकर, उन्होंने छोटी उम्र से ही देश की सेवा करने का संकल्प लिया। उनके पिता ने कहा, "वह पहले वायु सेना में शामिल होना चाहते थे, लेकिन जब वह नौसेना में शामिल हुए तो बहुत खुश थे।"
यादों को संजोकर रखना
परिवार अब हर संभव तरीके से विनय की याद को सम्मानित करने की कोशिश कर रहा है। उनकी पत्नी हिमांशी, बहन और दादा-दादी सभी अपने-अपने तरीके से इस दर्द का सामना कर रहे हैं। परिवार मानता है कि आतंकवाद के खिलाफ कड़ी कार्रवाई एक महत्वपूर्ण संदेश देती है।