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कनिमोझी ने पोंगल को तमिल नव वर्ष घोषित करने का श्रेय करुणानिधि को दिया

द्रविड़ मुन्नेत्र कज़गम की सांसद कनिमोझी ने पोंगल को तमिल नव वर्ष के रूप में मान्यता देने का श्रेय पूर्व मुख्यमंत्री करुणानिधि को दिया है। इस बयान ने पोंगल और तमिल नव वर्ष के बीच सांस्कृतिक और राजनीतिक महत्व को लेकर नई बहस को जन्म दिया है। विजय के शुभकामना संदेश ने भी इस विषय पर ध्यान आकर्षित किया है। जानें इस पर और क्या कहा गया है और पोंगल के महत्व को कैसे देखा जा रहा है।
 

पोंगल और तमिल नव वर्ष का सांस्कृतिक महत्व

द्रविड़ मुन्नेत्र कज़गम की सांसद कनिमोझी ने हाल ही में पोंगल को "तमिल नव वर्ष" के रूप में मान्यता देने का श्रेय पूर्व मुख्यमंत्री करुणानिधि को दिया। यह बयान कनिमोझी ने तमिलगा वेट्री कज़गम के नेता विजय के 'X' पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए दिया, जिसमें उन्होंने थाई पोंगल और तमिल नव वर्ष की शुभकामनाएं दी थीं। इस पोस्ट ने पोंगल के तमिल नव वर्ष से संबंध को लेकर एक नई बहस को जन्म दिया।


 


कनिमोझी ने कहा कि करुणानिधि ने पोंगल दिवस को तमिल नव वर्ष के रूप में मान्यता दी थी, और अब कई लोग इसे मनाने लगे हैं। उनके लिए भी यह दिन तमिल नव वर्ष है। विजय ने सोशल मीडिया पर एक संदेश साझा करते हुए कहा, "थाई पोंगल के इस शुभ अवसर पर, दुनिया भर के तमिलों के जीवन में प्रेम, शांति, स्वास्थ्य और समृद्धि का संचार हो। सभी को पोंगल और तमिल नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं।"


 


इस शुभकामना संदेश ने ध्यान आकर्षित किया, क्योंकि पारंपरिक रूप से तमिल नव वर्ष अप्रैल में चिथिरई महीने में मनाया जाता है, न कि जनवरी में थाई पोंगल के समय। 2008 में, दिवंगत मुख्यमंत्री एम. करुणानिधि के नेतृत्व में डीएमके सरकार ने प्राचीन तमिल साहित्य और ऐतिहासिक साक्ष्यों का हवाला देते हुए थाई 1 (पोंगल दिवस) को आधिकारिक रूप से तमिल नव वर्ष घोषित किया था। हालांकि, बाद में आई सरकारों ने चिथिरई को नव वर्ष के रूप में पुनः अपनाया, लेकिन पोंगल पर आधारित नव वर्ष द्रविड़ विचारधारा और सुधारवादी राजनीति से जुड़ा हुआ है।


 


टीवीके के नीति एवं प्रचार महासचिव अरुणराज ने भी पोंगल को राजनीतिक बदलाव से जोड़ते हुए एक महत्वपूर्ण संदेश साझा किया। उन्होंने लिखा, "पुरानी व्यवस्था को समाप्त होने दो... नई व्यवस्था को उदय होने दो," और पोंगल को पुराने को छोड़कर नए को अपनाने का प्रतीक बताया। उन्होंने इस त्योहार को समकालीन राजनीति से जोड़ते हुए कहा कि तमिलनाडु एक नए राजनीतिक युग की ओर बढ़ रहा है। उन्होंने किसानों को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि पोंगल उन लोगों का सम्मान करता है जो अपनी मेहनत और मिट्टी पर भरोसा करते हैं, और अंत में कहा, "सभी को विजय पोंगल और तमिल नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं!"