कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी का भारत दौरा: आर्थिक रिश्तों को मजबूत करने की कोशिश
कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी का भारत दौरा कई महत्वपूर्ण पहलुओं को उजागर करता है। इस दौरे में पंजाब न जाने का निर्णय और आर्थिक संबंधों को मजबूत करने की कोशिशें शामिल हैं। कार्नी ने भारत के साथ रिश्तों में सुधार के लिए कई कदम उठाए हैं, जो पिछले तनावपूर्ण समय की तुलना में एक सकारात्मक बदलाव को दर्शाते हैं। इस लेख में जानें कि कैसे कनाडा ने अपने रुख में बदलाव किया है और दोनों देशों के बीच संबंधों को सुधारने के लिए क्या प्रयास किए जा रहे हैं।
Feb 26, 2026, 15:01 IST
मार्क कार्नी का भारत दौरा
कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी का भारत दौरा कुछ खास बातों के लिए चर्चा में है। इस बार कार्नी पंजाब नहीं जा रहे हैं, जो कि उनके पूर्ववर्ती प्रधानमंत्री के रिवाज से भिन्न है। यह निर्णय भारतीय समुदाय को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। कार्नी ने संकेत दिया है कि उनका यह दौरा मुख्य रूप से आर्थिक संबंधों को मजबूत करने और जस्टिन ट्रूडो के कार्यकाल में खालिस्तानी आतंकवादी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के बाद बिगड़े द्विपक्षीय संबंधों को सुधारने के लिए है।
भारत-कनाडा के रिश्तों में सुधार
पिछले साल पद ग्रहण करने के बाद से, कार्नी ने भारत के साथ कनाडा के खराब रिश्तों को सुधारने के लिए कई कदम उठाए हैं। यह उनकी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ तीसरी बैठक है, जो एक साल पहले के तनावपूर्ण हालात की तुलना में एक सकारात्मक बदलाव को दर्शाता है।
कनाडा का नया रुख
हाल ही में, कार्नी ने मुंबई के लिए रवाना होने से पहले यह स्पष्ट किया कि भारत अब कनाडा में होने वाले हिंसक अपराधों से जुड़ा नहीं है। इस बदलाव से ओटावा में सिख एक्टिविस्टों में नाराजगी है।
CBC की रिपोर्ट के अनुसार, एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने कहा, 'अगर हमें लगता कि भारत कनाडा की लोकतांत्रिक प्रक्रिया में सक्रिय रूप से हस्तक्षेप कर रहा है, तो शायद हम यह यात्रा नहीं करते।'
कनाडा-भारत के रिश्तों में गिरावट
रिश्तों में गिरावट सितंबर 2023 में शुरू हुई, जब ट्रूडो ने भारत पर आरोप लगाया कि वह निज्जर की हत्या में शामिल है। भारत ने इन आरोपों को खारिज कर दिया, जिसके बाद दोनों देशों के बीच एक बड़ा कूटनीतिक टकराव हुआ।
मार्क कार्नी का दृष्टिकोण
कार्नी ने पिछले साल जून में G7 समिट में पीएम मोदी को व्यक्तिगत रूप से आमंत्रित किया, जिससे दोनों देशों के बीच संबंधों में सुधार की शुरुआत हुई। इसके बाद, दोनों नेताओं ने कई बार मुलाकात की और व्यापारिक संबंधों को मजबूत करने के लिए सहमति बनाई।
ट्रंप का प्रभाव
कार्नी के लिए, ट्रंप का व्यापारिक दबाव एक चुनौती रहा है। हालांकि, उन्होंने इसे हल्के में नहीं लिया और वैश्विक मंच पर कनाडा की स्थिति को मजबूत करने का प्रयास किया।
आर्थिक सहयोग की दिशा में कदम
अब, कार्नी भारत के साथ आर्थिक संबंधों को मजबूत करने के लिए कई महत्वपूर्ण सौदों पर चर्चा करने आए हैं, जिसमें यूरेनियम आपूर्ति और अन्य आवश्यक खनिज शामिल हैं। यह एक व्यावहारिक दृष्टिकोण है, जिसमें कार्नी खालिस्तानी मुद्दे और निज्जर की हत्या के बाद बिगड़े रिश्तों को सुधारने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।