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कच्चे तेल की कीमतों पर फिच का नया अनुमान: 2026 में राहत की उम्मीद नहीं

ग्लोबल रेटिंग एजेंसी फिच ने कच्चे तेल की कीमतों पर एक नया अनुमान जारी किया है, जिसमें 2026 में राहत की उम्मीद नहीं जताई गई है। रिपोर्ट के अनुसार, तेल की कीमतें औसतन 87 डॉलर प्रति बैरल रहने की संभावना है, और यदि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खुलता है, तो कीमतों में गिरावट आ सकती है। जानें इस संकट का वैश्विक बाजार पर क्या प्रभाव पड़ेगा और ओपेक के निर्णयों का क्या असर होगा।
 

कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि का संकट


पिछले 100 दिनों से कच्चे तेल की चर्चा सबसे अधिक हो रही है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बंद होने के कारण कई देशों को तेल संकट का सामना करना पड़ रहा है। वैश्विक बाजार में कच्चा तेल जो पहले 70-75 डॉलर प्रति बैरल बिकता था, अब उसकी कीमत 100-120 डॉलर प्रति बैरल के पार जा चुकी है। इस स्थिति में, ग्लोबल रेटिंग एजेंसी फिच ने कच्चे तेल की कीमतों के बारे में एक नया अनुमान जारी किया है।


फिच के अनुसार, 2026 में ब्रेंट क्रूड की कीमतों में कोई खास राहत नहीं मिलने वाली है। औसतन, तेल की कीमत 87 डॉलर प्रति बैरल के आसपास रहने की संभावना है। मई से जुलाई के बीच, कच्चे तेल की कीमत 100 से 110 डॉलर प्रति बैरल के बीच रह सकती है।


स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का प्रभाव

यदि ईरान होर्मुज को फिर से खोलने के लिए सहमत होता है और जहाजों की आवाजाही शुरू होती है, तो तेल की कीमतों में थोड़ी कमी आ सकती है। होर्मुज के खुलने की स्थिति में, अगस्त और सितंबर में कीमतों में तेज गिरावट देखने को मिल सकती है।


फिच के अनुसार, 2026 में कच्चे तेल की कीमत औसतन 87 डॉलर प्रति बैरल रहने का अनुमान है। अगस्त के बाद, कीमतें 80 डॉलर प्रति बैरल तक गिर सकती हैं, और सितंबर के बाद लगभग 70 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचने की संभावना है। यह अनुमान इस आधार पर है कि जुलाई में होर्मुज खुल जाएगा।


तेल की आपूर्ति और ओपेक का निर्णय

फिच ने यह भी बताया है कि मौजूदा कीमतों में वृद्धि उत्पादन के कारण नहीं, बल्कि आपूर्ति की कमी के कारण हुई है। रिफाइनरियों और तेल उत्पादन को स्थायी नुकसान नहीं हुआ है। होर्मुज के खुलने के बाद, सितंबर से कच्चे तेल की ओवरसप्लाई होने की संभावना है। ओपेक और ओपेक प्लस देशों ने भी उत्पादन बढ़ाने का निर्णय लिया है।


स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बंद होने से तेल की आपूर्ति पर सबसे अधिक प्रभाव पड़ा है। इस मार्ग से प्रतिदिन लगभग 2 करोड़ बैरल तेल की आपूर्ति होती है, जो दुनिया की कुल तेल आपूर्ति का पांचवां हिस्सा है। युद्ध के कारण होर्मुज बंद है, लेकिन तेल के भंडार सुरक्षित हैं। ऐसे में, सप्लाई शुरू होने के बाद 2026 के अंत तक तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट आ सकती है।