×

ओवैसी ने मोदी की इजरायल यात्रा पर उठाए सवाल, कहा गलत संदेश गया

एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इजरायल यात्रा पर सवाल उठाते हुए कहा कि इससे गलत संदेश गया है। उन्होंने इजरायल द्वारा ईरान पर हमले के संदर्भ में भारत की तटस्थता की विरासत को याद दिलाया। ओवैसी ने यह भी पूछा कि क्या मोदी को हमले की पूर्व सूचना थी और यदि नहीं, तो इजरायल ने भारत को धोखा दिया है। उनके बयान से यह स्पष्ट होता है कि वे इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री और भाजपा से जवाब मांग रहे हैं।
 

ओवैसी का बयान

एआईएमआईएम के नेता असदुद्दीन ओवैसी ने शनिवार को बयान दिया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इजरायल यात्रा ने तेल अवीव द्वारा तेहरान पर हमले से पहले "गलत संदेश" भेजा है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत हमेशा इस संघर्ष में तटस्थ रहा है। ओवैसी ने आरोप लगाया कि इजरायल ने मोदी की यात्रा का उपयोग यह दिखाने के लिए किया कि भारत उनके साथ खड़ा है और उन्होंने भारतीय सरकार से इस मुद्दे पर स्पष्ट रुख अपनाने की मांग की।


भारतीय नागरिकों की सुरक्षा पर चिंता

ओवैसी ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि खाड़ी देशों में लगभग 1 करोड़ भारतीय नागरिक निवास करते हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि मोदी की यात्रा के तुरंत बाद इजरायल द्वारा ईरान पर हमले का क्या संदेश जाएगा? उन्होंने कहा कि बहरीन और कतर पर हमले हो चुके हैं, और सऊदी अरब पर भी खतरा मंडरा रहा है। ओवैसी ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री और भाजपा को यह समझना चाहिए कि भारत की 80 साल पुरानी तटस्थता का क्या हुआ है।


प्रधानमंत्री से सवाल

ओवैसी ने आगे कहा कि ये ऐसे प्रश्न हैं जिनका उत्तर प्रधानमंत्री और भाजपा को देना होगा। उन्होंने कहा कि इजरायल ने मोदी की यात्रा का उपयोग हमला करने के लिए किया और यह विश्वासघात है। ओवैसी ने यह भी पूछा कि क्या मोदी को इस हमले की पूर्व सूचना थी। यदि नहीं, तो उन्होंने कहा कि इजरायल ने भारत को धोखा दिया है।


हमले की जिम्मेदारी

उन्होंने यह भी कहा कि यदि प्रधानमंत्री का विमान हवा में होता और हमला होता, तो इसके लिए कौन जिम्मेदार होता? प्रधानमंत्री को यह स्पष्ट करना चाहिए कि क्या नेतन्याहू ने उन्हें ईरान पर हमले की सूचना दी थी। यदि ऐसा था, तो मोदी को तुरंत अपनी यात्रा समाप्त कर लौट जाना चाहिए था। यदि इजरायल ने भारत को सूचित नहीं किया, तो यह धोखा है। ओवैसी ने कहा कि इजरायल ने मोदी की यात्रा का उपयोग ईरान पर हमले और गाजा में फिलिस्तीनियों के नरसंहार को छिपाने के लिए किया है। इससे यह संदेश जाएगा कि भारत इजरायल के साथ है, ईरान के साथ नहीं।