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ओवैसी के हिजाब वाली प्रधानमंत्री के बयान पर तीखी प्रतिक्रियाएँ

एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी के 'हिजाब वाली प्रधानमंत्री' के बयान ने राजनीतिक और धार्मिक हलकों में बहस को जन्म दिया है। स्वामी रामभद्राचार्य ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया दी है, इसे 'दुर्भाग्यपूर्ण' बताते हुए। ओवैसी का यह बयान सोलापुर में एक चुनावी सभा के दौरान आया, जहां उन्होंने भारत के संविधान की प्रशंसा की और अपनी इच्छा व्यक्त की कि एक दिन हिजाब पहनने वाली महिला प्रधानमंत्री बने। बीजेपी और अन्य संगठनों ने इसे सांप्रदायिक राजनीति का हिस्सा बताया है।
 

राजनीतिक और धार्मिक बहस का केंद्र

एआईएमआईएम के नेता असदुद्दीन ओवैसी द्वारा 'हिजाब वाली प्रधानमंत्री' के बयान ने राजनीतिक और धार्मिक हलकों में चर्चा को बढ़ावा दिया है। बीजेपी के बाद, प्रसिद्ध आध्यात्मिक गुरु जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य ने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने ओवैसी की इस इच्छा को 'दुर्भाग्यपूर्ण' बताया है।


स्वामी रामभद्राचार्य की प्रतिक्रिया

स्वामी रामभद्राचार्य ने ओवैसी के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, 'यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है। देश ने अब्दुल कलाम को राष्ट्रपति और हामिद अंसारी को उपराष्ट्रपति बनाया, उन्हें और क्या चाहिए? ओवैसी दिन में सपने देख रहे हैं। यदि भारत में कोई महिला प्रधानमंत्री बनती है, तो वह हिजाब नहीं बल्कि साड़ी पहनेगी।'


विवाद की उत्पत्ति

विवाद की शुरुआत कैसे हुई?

यह विवाद महाराष्ट्र के सोलापुर में ओवैसी की एक चुनावी सभा के बाद शुरू हुआ। ओवैसी ने भारत के संविधान की प्रशंसा करते हुए अपनी एक इच्छा व्यक्त की थी।
उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के संविधान में केवल एक विशेष धर्म का व्यक्ति ही प्रधानमंत्री बन सकता है, जबकि भारत का संविधान सभी नागरिकों को समान अधिकार देता है। उन्होंने कहा, 'मेरा सपना है कि एक दिन ऐसा आए जब हिजाब पहनने वाली बेटी इस देश की प्रधानमंत्री बने।'


विरोध की आवाज़ें

बढ़ता विरोध

ओवैसी के इस बयान को बीजेपी और अन्य संगठनों ने 'सांप्रदायिक राजनीति' का हिस्सा करार दिया है। विरोधियों का कहना है कि ओवैसी विकास के मुद्दों पर ध्यान देने के बजाय धार्मिक पहचान के आधार पर लोगों को विभाजित करने की कोशिश कर रहे हैं।