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ओवैसी का किरेन रिजिजू पर हमला: मुस्लिम अधिकारों का उल्लंघन

असदुद्दीन ओवैसी ने केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू पर मुस्लिम समुदाय के मौलिक अधिकारों के उल्लंघन का आरोप लगाया है। उन्होंने रिजिजू की टिप्पणियों पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए उन्हें अल्पसंख्यक विरोधी करार दिया। ओवैसी ने भारतीय संविधान के अनुच्छेद 30 का हवाला देते हुए कहा कि हर गैर-हिंदू समूह को कानूनी रूप से अल्पसंख्यक माना जाना चाहिए। इस विवाद ने महाराष्ट्र में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद तूल पकड़ा, जहां ओवैसी ने मतदाता सूची की सत्यता पर चिंता जताई।
 

ओवैसी का तीखा बयान

ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के नेता असदुद्दीन ओवैसी ने बुधवार को केंद्रीय अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि रिजिजू भारत में मुस्लिम समुदाय के मौलिक अधिकारों को जानबूझकर नकारने के लिए प्रचार कर रहे हैं। यह विवाद तब शुरू हुआ जब रिजिजू ने मुसलमानों की अल्पसंख्यक स्थिति की तुलना पारसी समुदाय से की। उन्होंने कहा कि भारत की मुस्लिम जनसंख्या इतनी बड़ी है कि यह दुनिया का छठा सबसे बड़ा देश बन सकती है, जबकि पारसियों की संख्या केवल लगभग 53,000 है।


सोशल मीडिया पर ओवैसी की प्रतिक्रिया

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर ओवैसी ने रिजिजू को अल्पसंख्यक विरोधी मंत्री करार दिया और उनकी जनसांख्यिकी की समझ पर सवाल उठाया। उन्होंने बताया कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 30 के अनुसार, जो अल्पसंख्यकों को शैक्षणिक संस्थान स्थापित करने का अधिकार देता है, हिंदू-बहुसंख्यक राष्ट्र में हर गैर-हिंदू समूह कानूनी रूप से अल्पसंख्यक है।


गणितीय प्रश्न और तर्क

ओवैसी ने रिजिजू से एक सरल गणितीय प्रश्न पूछा: क्या बड़ा है? 79.8% या 14%? उन्होंने कहा कि यदि हिंदू बहुसंख्यक हैं, तो हर गैर-हिंदू समूह अल्पसंख्यक है। ओवैसी ने यह भी कहा कि मंत्री मुसलमानों के मौलिक अधिकारों को छीनने के लिए दुष्प्रचार कर रहे हैं। उन्होंने क्षेत्रीय भाषाविज्ञान का उदाहरण देते हुए कहा कि यदि जनसंख्या के आधार पर किसी समूह को अल्पसंख्यक नहीं माना जा सकता, तो गैर-हिंदी भाषी राज्यों में हिंदी भाषी लोगों को भी भाषाई अल्पसंख्यक नहीं माना जा सकता।


मतदाता सूची और नागरिकता मुद्दे

यह विवाद ओवैसी द्वारा महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद बढ़ा, जहां उन्होंने स्थानीय मतदाता सूची की सत्यता पर चिंता जताई थी। ओवैसी ने आरोप लगाया कि एक सुनियोजित एजेंडा के तहत मुस्लिम समुदाय को निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मतदाता सूचियों के विशेष संशोधन को राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) और राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (NPR) से जोड़ा जा रहा है।


सुप्रीम कोर्ट का निर्देश

ओवैसी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने मैपिंग को अनिवार्य किया है और यदि यह नहीं किया गया, तो माता-पिता के नामों के आधार पर किया जाएगा। उन्होंने यह भी बताया कि 27 लाख नामों के सत्यापन के दौरान, 97 प्रतिशत नाम मुसलमानों के थे।