ओवैसी का आरोप: मुसलमानों को निशाना बनाने की सुनियोजित साजिश
एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने मुसलमानों को निशाना बनाने की सुनियोजित साजिश का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि विशेष गहन संशोधन (एसआईआर) को एनआरसी और एनपीआर से जोड़ा जा रहा है। ओवैसी ने यह भी बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने मानचित्रण को अनिवार्य किया है। इसके अलावा, उन्होंने निदा खान मामले और बुर्का पहनने पर उठाए गए सवालों पर भी अपनी चिंताएं व्यक्त की हैं। जानें उनके बयान के प्रमुख बिंदु और इस मुद्दे की गहराई।
May 9, 2026, 19:05 IST
ओवैसी का बयान
एआईएमआईएम के नेता और सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने शनिवार को यह आरोप लगाया कि मुसलमानों को एक सुनियोजित योजना के तहत निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि विशेष गहन संशोधन (एसआईआर) को राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) और राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (एनपीआर) से जोड़ा जा रहा है। छत्रपति संभाजीनगर में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में ओवैसी ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने मानचित्रण को अनिवार्य कर दिया है, और यदि यह नहीं किया गया, तो माता-पिता के नामों का उपयोग किया जाएगा।
साजिश का आरोप
ओवैसी ने कहा कि मुसलमानों को एक सुनियोजित साजिश के तहत फंसाया जा रहा है, जो नफरत पर आधारित है। उन्होंने यह भी कहा कि यह मामला अदालत में पेश किया जाएगा और किसी पर भी आरोप लगाए जा सकते हैं। एआईएमआईएम के मतदाताओं से अपील करते हुए ओवैसी ने कहा कि यह मुद्दा केवल मुसलमानों तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज के सभी वर्गों से संबंधित है। उन्होंने यह भी बताया कि एसआईआर को एनआरसी और एनपीआर से जोड़ा जा रहा है, जिसका संचालन गृह मंत्रालय करेगा।
निदा खान मामले पर टिप्पणी
निदा खान के मामले का जिक्र करते हुए ओवैसी ने कहा कि टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) ने स्पष्ट किया है कि निदा खान मानव संसाधन कर्मचारी नहीं थीं। उन्होंने आरोप लगाया कि एफआईआर दर्ज होने से पहले ही उनका नाम सार्वजनिक कर दिया गया और सत्ताधारी पार्टी पर मीडिया ट्रायल चलाने का आरोप लगाया। ओवैसी ने कहा कि टीसीएस ने यह भी स्पष्ट किया है कि निदा खान मानव संसाधन कर्मचारी नहीं थीं।
बुर्का और धार्मिक किताबों पर सवाल
ओवैसी ने एफआईआर में महिला के घर से बुर्का बरामद होने के संदर्भ में सवाल उठाते हुए पूछा कि क्या बुर्का पहनना अब गैरकानूनी हो गया है। उन्होंने यह भी पूछा कि अगर किसी के पास पैगंबर मुहम्मद से संबंधित किताबें या उर्दू कविताएं हों, तो इसमें क्या गलत है। एआईएमआईएम प्रमुख ने कहा कि यह मामला अदालत में पेश किया जाएगा और आरोप लगाया कि ये आरोप नफरत के आधार पर लगाए जा रहे हैं।