ओडिशा में लक्ष्मणानंद सरस्वती हत्या मामले की जांच में नया मोड़
सीआईडी ने शुरू की जांच
भुवनेश्वर, 28 जुलाई: ओडिशा पुलिस की अपराध शाखा (सीआईडी) ने विश्व हिंदू परिषद के नेता लक्ष्मणानंद सरस्वती की हत्या और 2008 में कंधमाल में हुई सांप्रदायिक हिंसा से संबंधित जांच आयोग की रिपोर्ट के गायब होने के मामले में मंगलवार को मामला दर्ज किया। यह घटना उस समय हुई थी जब राज्य में बीजू जनता दल (बीजद) की सरकार थी। पहले इस मामले की जांच भुवनेश्वर-कटक पुलिस आयुक्तालय द्वारा की जा रही थी।
मुख्यमंत्री का आदेश
मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने सोमवार को मामले की जांच सीआईडी को सौंपने का निर्देश दिया। रिपोर्ट के गायब होने की शिकायत 10 जून को राजधानी पुलिस थाने में दर्ज की गई थी, जिसकी जांच पुलिस आयुक्तालय कर रहा था। गृह विभाग के संयुक्त सचिव शरत चंद्र मरांडी की शिकायत पर प्राथमिकी दर्ज की गई।
गायब रिपोर्टों की संदिग्ध परिस्थितियाँ
शिकायतकर्ता ने कहा कि दोनों रिपोर्टों के गायब होने की परिस्थितियाँ संदेह पैदा करती हैं कि दस्तावेजों को जानबूझकर हटाया गया या छिपाया गया। अधिकारियों ने बताया कि मुख्यमंत्री ने मामले को सीआईडी को सौंपा, जब तीन पूर्व आईएएस अधिकारियों — वीके पांडियन, यूएन बेहरा और राजेश वर्मा — को पूछताछ के लिए बुलाया गया था, लेकिन वे जांच अधिकारी के सामने पेश नहीं हुए। आरोप है कि जून 2024 में सत्ता परिवर्तन के दौरान मुख्यमंत्री कार्यालय से दो जांच आयोगों की रिपोर्ट गायब हो गई थीं।
राजनीतिक विवाद
इस दौरान बीजद सत्ता से बाहर हो गया और राज्य में भाजपा की सरकार बनी। ये तीनों पूर्व आईएएस अधिकारी बीजद सरकार के दौरान मुख्यमंत्री कार्यालय में तैनात थे, जब न्यायमूर्ति एएस नायडू आयोग ने 2016 में अपनी रिपोर्ट पेश की थी। सीआईडी ने भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है, जिसमें चोरी, आपराधिक विश्वासघात और साक्ष्य नष्ट करने से संबंधित धाराएँ शामिल हैं।
जांच की जिम्मेदारी
सीआईडी के पुलिस उपाधीक्षक आशुतोष मिश्रा को मामले की जांच का कार्यभार सौंपा गया है, जबकि सीआईडी अपराध शाखा के पुलिस अधीक्षक अनिरुद्ध राउत्रे जांच की प्रगति की निगरानी करेंगे। नायडू आयोग की रिपोर्ट के अलावा, 2016 में हुए सम अस्पताल अग्निकांड की राजस्व संभागीय आयुक्त की जांच रिपोर्ट भी मुख्यमंत्री कार्यालय से गायब होने की बात सामने आई है।
बीजद का आरोप
हालांकि, सूत्रों के अनुसार, सीआईडी केवल कंधमाल हिंसा से संबंधित आयोग रिपोर्ट के गायब होने की जांच करेगी। फाइलों के गायब होने की घटना के बाद ओडिशा में राजनीतिक विवाद बढ़ गया है। बीजद ने आरोप लगाया है कि रिपोर्टें गायब नहीं हुई हैं, बल्कि भाजपा सरकार ने जनता का ध्यान भटकाने के लिए उन्हें दबा दिया है।