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ओडिशा में बाढ़ की स्थिति गंभीर, प्रशासन ने उठाए कदम

ओडिशा में बृहस्पतिवार को बाढ़ की स्थिति गंभीर बनी हुई है, खासकर चार उत्तरी जिलों में। प्रशासन ने सभी अधिकारियों की छुट्टियां रद्द कर दी हैं और 1.65 लाख से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। महानदी का जलस्तर बढ़ने से निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। मुख्यमंत्री ने नागरिकों से घबराने की बजाय सतर्क रहने की अपील की है। जानें इस संकट की पूरी जानकारी और प्रशासन की तैयारियों के बारे में।
 

ओडिशा में बाढ़ की गंभीरता

भुवनेश्वर, 30 जुलाई: ओडिशा में बृहस्पतिवार को बाढ़ की स्थिति अत्यंत गंभीर बनी हुई है, विशेषकर राज्य के चार उत्तरी जिलों में हालात चिंताजनक हैं। महानदी का जलस्तर लगातार बढ़ने से निचले क्षेत्रों में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है, जैसा कि अधिकारियों ने बताया। राज्य के राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री सुरेश पुजारी ने कहा कि उत्तर ओडिशा की कुछ नदियों का जलस्तर गिरना शुरू हुआ है, लेकिन वे अब भी खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं.


प्रशासन की तैयारी और बचाव कार्य

उन्होंने आगे कहा कि लगातार बारिश के कारण कई और इलाके रातभर में जलमग्न हो गए हैं। मंत्री ने बताया, "प्रशासन पूरी तरह से सतर्क है और बाढ़ प्रभावित जिलों के सभी अधिकारियों की छुट्टियां रद्द कर दी गई हैं।" गहरे निम्न वायु दाब क्षेत्र के प्रभाव से बालासोर, भद्रक, जाजपुर और मयूरभंज जिलों के कई गांव जलमग्न हो गए हैं। भारत मौसम विज्ञान विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, प्रशासन ने भद्रक, जाजपुर, नबरंगपुर और कालाहांडी जिलों में स्कूलों और आंगनवाड़ी केंद्रों को बंद करने का आदेश दिया है.


बचाव अभियान और प्रभावित लोग

अधिकारियों ने बताया कि बचाव कार्य तेज कर दिया गया है और अब तक 1.65 लाख से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। बाढ़ से अब तक छह लाख से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं। जाजपुर के जिलाधिकारी अंबर कुमार कर ने कहा कि बुधवार रात दशरथपुर प्रखंड के अंतर्गत पाटना के पास बैतरणी नदी की सहायक कानी नदी के तटबंध में दो स्थानों पर दरार आने से बाढ़ की स्थिति और गंभीर हो गई.


महानदी का बढ़ता जलस्तर

अधिकारियों के अनुसार, तटबंध टूटने से कई गांव चारों ओर से पानी से घिर गए हैं और नए क्षेत्रों में भी जलभराव हो गया है, जिससे तीन प्रखंडों के लोगों पर गंभीर असर पड़ा है। इस बीच, महानदी का बढ़ता जलस्तर प्रशासन के लिए चिंता का विषय बन गया है। छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश के ऊपरी जलग्रहण क्षेत्रों में भारी वर्षा के बाद, नदी के किनारे स्थित जिलों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं.


बांध की स्थिति

एक अधिकारी ने बताया कि तेल, इब और जीरा नदियों का बाढ़ का पानी भी महानदी में मिल रहा है, जिससे नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। हीराकुंड बांध में जलस्तर 620 फुट दर्ज किया गया है, जबकि इसकी पूर्ण जलाशय क्षमता 630 फुट है। बांध में 3,31,063 क्यूसेक पानी की आवक हो रही है, जबकि दो फाटकों के माध्यम से 64,109 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है.


मुख्यमंत्री की अपील

मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने बुधवार रात सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा कि उन्होंने सभी जिलाधिकारियों को उच्च सतर्कता बरतने और प्रभावित लोगों तक समय पर सहायता पहुंचाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा, "मैं सभी लोगों से अपील करता हूं कि बाढ़ की स्थिति को लेकर घबराएं नहीं। नागरिकों की सुरक्षा राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।" भुवनेश्वर मौसम विज्ञान केंद्र की निदेशक मनोरमा मोहंती ने कहा कि बृहस्पतिवार को राज्य में वर्षा में कमी आने की संभावना है, हालांकि कई जिलों में गरज के साथ हल्की बारिश हो सकती है.