ऑस्ट्रेलिया में लापता युवक की रहस्यमय कहानी
अजीबोगरीब घटना:
आज भी नौकरी युवाओं के लिए प्राथमिकता है। जॉब के विज्ञापन या उससे जुड़ी कोई भी जानकारी युवाओं के बीच काफी लोकप्रिय होती है। ‘जब नौकरी मिलेगी तो क्या होगा…’ नामक एक गाना भी बहुत चर्चित हुआ था।
रिकी की कहानी:
रिकी, जो नई नौकरी के पहले दिन के ख्यालों में खोया हुआ था, अच्छे संगीत के साथ अपनी गाड़ी चला रहा था। अचानक एक ऐसी घटना घटित होती है कि वह ढाई महीनों तक लापता रहता है और एक हड्डियों के ढांचे में बदल जाता है।
रिकी के साथ क्या हुआ?
जब रिकी को होश आया, तो वह एक रेगिस्तानी कब्र पर था, बिना कपड़ों के और मानसिक स्थिति खराब थी। उसे भूख लगी थी और चारों ओर सिर्फ रेत थी। ऐसे कठिन हालात में वह 71 दिन तक जीवित रहा, मेढ़क और सांप खाकर। जब कुछ लोगों ने उसे देखा, तब उसकी जान में जान आई।
वो ‘मनहूस’ दिन!
रिकी ऑस्ट्रेलिया के दूसरे छोर पर नई शुरुआत करने जा रहे थे, तभी उन्होंने एक सहयात्री को लिफ्ट देने का निर्णय लिया। यह मदद का विचार जल्द ही बुरे सपने में बदल गया, क्योंकि उन्हें नशीला पदार्थ देकर एक खतरनाक इलाके में छोड़ दिया गया। यह मामला अब तक अनसुलझा है।
अनसुलझा रहस्य:
‘द मिरर’ की रिपोर्ट के अनुसार, 2006 में एक दुर्गम क्षेत्र में मवेशी फार्म के मजदूरों ने एक गंभीर रूप से कुपोषित व्यक्ति को देखा। यह रिकी था, जो 10 हफ्ते पहले बिना किसी सुराग के लापता हो गया था।
रिकी का सफर:
रिकी एक प्रसिद्ध घुमक्कड़ था और उसने पोर्ट हेडलैंड को नई जिंदगी के अवसर के रूप में देखा। उन्हें 3000 किलोमीटर के खतरनाक रास्ते से गुजरना था। रिकी ने अपनी यात्रा के दौरान कई बार दावा किया कि उनकी गाड़ी में खराबी आई थी।
अबूझ पहेली:
रिकी ने बताया कि उन्होंने एक आदिवासी सहयात्री को लिफ्ट दी थी, जिसने उनके पेय में नशीला पदार्थ मिला दिया। 2010 में, उन्होंने अपने संस्मरण में इस घटना का विवरण बदल दिया। उन्होंने लिखा कि यह क्षेत्र नंगे पांव चलने के लिए बहुत कठिन था।
जीवित रहने की जद्दोजहद:
रिकी ने अपने संस्मरण में बताया कि उन्होंने सांप, चींटियों, और मेंढकों को खाकर जिंदा रहने की कोशिश की। जब प्यास लगती, तो वह अपना यूरिन पीकर या सुबह की ओस इकट्ठा करके अपनी प्यास बुझाते थे।