ऑस्ट्रेलिया ने पेट्रोल-डीजल पर टैक्स में की बड़ी कटौती, भारत में स्थिति क्या है?
ग्लोबल मार्केट में तेल की कीमतों में वृद्धि
ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच चल रहे संघर्ष के कारण वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं। 30 मार्च को कच्चा तेल 116 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को पार कर गया। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर प्रतिबंधों के चलते उन देशों में ऊर्जा संकट उत्पन्न हो रहा है, जो अपनी आवश्यकताओं के लिए आयात पर निर्भर हैं। पाकिस्तान, श्रीलंका और चीन जैसे देशों ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों में भारी वृद्धि की है, जबकि अन्य देश इस बढ़ती कीमतों के दबाव को सहन कर रहे हैं।
ऑस्ट्रेलिया में टैक्स में कटौती
ऑस्ट्रेलियाई सरकार ने आम जनता पर बढ़ती पेट्रोल-डीजल कीमतों के बोझ को कम करने के लिए टैक्स में महत्वपूर्ण कटौती की है। प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज ने फ्यूल टैक्स में 50% की कमी करने का निर्णय लिया है। सरकार ने एक राष्ट्रीय ईंधन सुरक्षा योजना भी जारी की है। अगले तीन महीनों के लिए, पेट्रोल पर टैक्स को आधा कर दिया गया है, जिससे प्रति लीटर पेट्रोल पर 52 सेंट का सेल्स टैक्स अब 26 सेंट हो गया है। इस निर्णय से सरकार को 1.75 अरब डॉलर का नुकसान होगा, लेकिन इससे पेट्रोल-डीजल की कीमतें कम हो गई हैं।
भारत में पेट्रोल-डीजल पर टैक्स की स्थिति
हाल ही में भारत सरकार ने पेट्रोल-डीजल पर 10 रुपये की एक्साइज ड्यूटी में कटौती की थी, लेकिन इसका आम जनता पर कोई खास असर नहीं पड़ा। भारत में प्रति लीटर पेट्रोल-डीजल पर केंद्र और राज्य सरकार दोनों टैक्स वसूलती हैं। पेट्रोलियम मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, 1 लीटर पेट्रोल पर लगभग 21.90 रुपये का केंद्रीय कस्टम ड्यूटी लगता है, जिसमें विभिन्न प्रकार के टैक्स शामिल होते हैं। हाल की कटौती के बाद, एक्साइज ड्यूटी अब 11.90 रुपये प्रति लीटर हो गई है।