एयर इंडिया ने वित्तीय संकट के बीच खर्चों में कटौती का लिया निर्णय
एयर इंडिया की वित्तीय चुनौतियाँ
भारत की प्रमुख एयरलाइन एयर इंडिया वर्तमान में गंभीर वित्तीय संकट का सामना कर रही है। इस कठिन आर्थिक स्थिति को देखते हुए, कंपनी ने अपने खर्चों में कटौती करने का निर्णय लिया है। एयर इंडिया के सीईओ कैंपबेल विल्सन ने कर्मचारियों को स्पष्ट रूप से बताया है कि अब समय है कि फिजूलखर्ची को समाप्त किया जाए और कंजूसी से काम चलाया जाए।
सीईओ का सख्त निर्देश
कैंपबेल विल्सन ने कहा कि मौजूदा परिस्थिति में अनुशासन की आवश्यकता है और कंपनी को अपनी लागत पर ध्यान केंद्रित करना होगा। उन्होंने कर्मचारियों को निर्देश दिए हैं कि सभी गैर-जरूरी खर्चों को तुरंत निलंबित किया जाए। इसके अलावा, वेंडर्स और सर्विस प्रोवाइडर्स के साथ दरों पर फिर से बातचीत करने की सलाह दी गई है। विल्सन ने यह भी कहा कि कंपनी के भीतर किसी भी प्रकार की बर्बादी पर कड़ी नजर रखी जानी चाहिए।
ग्राहक सेवा में कोई समझौता नहीं
हालांकि, सीईओ ने खर्चों में कटौती की बात की है, लेकिन ग्राहकों के अनुभव में कोई कमी नहीं आने देने का भी आश्वासन दिया है। उन्होंने कहा कि हमें नेट प्रमोटर स्कोर (NPS) में सुधार जारी रखना होगा, ताकि यात्रियों को विश्वस्तरीय सुविधाएं मिलती रहें।
कर्मचारियों की नौकरी की सुरक्षा
वित्तीय संकट के बीच एयर इंडिया के कर्मचारियों में नौकरी को लेकर चिंता थी। इस चिंता को दूर करने के लिए कंपनी के चीफ ह्यूमन रिसोर्स ऑफिसर (CHRO) रवींद्र कुमार जीपी ने एक टाउनहॉल मीटिंग में कर्मचारियों को संबोधित किया। उन्होंने आश्वासन दिया कि कंपनी फिलहाल छंटनी की कोई योजना नहीं बना रही है, जिससे हजारों कर्मचारियों ने राहत की सांस ली है। कंपनी का ध्यान मौजूदा संसाधनों का बेहतर उपयोग करने पर है।