एनसीईआरटी की किताब में न्यायपालिका पर विवादित चैप्टर, सरकार की प्रतिक्रिया
कक्षा 8वीं की एनसीईआरटी सोशल साइंस किताब में 'न्यायपालिका में भ्रष्टाचार' विषय पर एक विवादित अध्याय जोड़े जाने के बाद, प्रधानमंत्री मोदी और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपनी नाराजगी व्यक्त की है। सुप्रीम कोर्ट ने इस अध्याय के प्रकाशन पर रोक लगाते हुए संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी किया है। सॉलिसिटर जनरल ने माफी मांगी और विवादित अध्याय के लेखकों को ब्लैकलिस्ट करने की जानकारी दी। इस मामले में न्यायपालिका की चुनौतियों और भ्रष्टाचार के मुद्दों पर चर्चा की गई है।
Feb 26, 2026, 18:58 IST
एनसीईआरटी किताब में विवाद
कक्षा 8वीं की एनसीईआरटी सोशल साइंस की पाठ्यपुस्तक में 'न्यायपालिका में भ्रष्टाचार' शीर्षक से एक अध्याय जोड़े जाने का मामला चर्चा का विषय बन गया है। सरकारी सूत्रों के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में इस मुद्दे पर अपनी गहरी असहमति व्यक्त की।
शिक्षा मंत्री का खेद
इस विवाद के बढ़ने पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने भी अपनी चिंता व्यक्त की। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार का न्यायपालिका का अपमान करने का कोई इरादा नहीं था। उन्होंने कहा, 'इस घटना से मैं अत्यंत दुखी हूं।'
सुप्रीम कोर्ट की कार्रवाई
सुप्रीम कोर्ट ने इस अध्याय के प्रकाशन पर तुरंत रोक लगा दी है। कोर्ट ने स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव और एनसीईआरटी के निदेशक दिनेश प्रसाद सकलानी को 'कारण बताओ नोटिस' जारी किया है।
केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत में बिना शर्त माफी मांगी। उन्होंने बताया कि जिन लोगों ने इस विवादास्पद अध्याय का मसौदा तैयार किया था, उन्हें ब्लैकलिस्ट कर दिया गया है और वे अब यूजीसी या किसी अन्य मंत्रालय के साथ काम नहीं करेंगे।
कोर्ट की कड़ी टिप्पणी
सुनवाई के दौरान जस्टिस सूर्यकांत ने नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि मीडिया के माध्यम से जो उत्तर मिला है, उसमें माफी का कोई उल्लेख नहीं है। जब सॉलिसिटर जनरल ने बताया कि 32 किताबें बेची गई थीं जिन्हें वापस लिया गया है, तो चीफ जस्टिस ने इसे एक 'गहरी साजिश' करार दिया। सीजेआई ने कहा, 'यह जानबूझकर उठाया गया कदम लगता है ताकि पूरी शिक्षण समुदाय, छात्रों और अभिभावकों के बीच यह संदेश जाए कि भारतीय न्यायपालिका भ्रष्ट है।'
विवादित अध्याय की सामग्री
एनसीईआरटी की नई किताब के इस अध्याय में न्यायपालिका की चुनौतियों का उल्लेख किया गया है। इसमें कहा गया है कि न्यायिक प्रणाली के विभिन्न स्तरों पर भ्रष्टाचार व्याप्त है, जिससे गरीबों के लिए न्याय प्राप्त करना और भी कठिन हो जाता है। अदालतों में मामलों का भारी अंबार और जजों की कमी एक बड़ी समस्या है। किताब के आंकड़ों के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट में 81,000, हाई कोर्ट में 62.40 लाख और जिला अदालतों में लगभग 4.70 करोड़ मामले लंबित हैं।