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एक साल बाद भी एयर इंडिया फ्लाइट हादसे का रहस्य बना हुआ है

एयर इंडिया की फ्लाइट हादसे को एक साल हो गया है, जिसमें 260 लोगों की जान गई थी। इस घटना के कारणों की जांच अभी भी जारी है। क्या यह पायलट की गलती थी या तकनीकी खराबी? जानें इस भयानक हादसे के बारे में और क्या कहती है जांच।
 

एयर इंडिया फ्लाइट हादसे की पहली बरसी

आज एयर इंडिया की उस दुर्घटना को एक साल हो गया है, जिसमें 260 लोगों की जान गई थी। यह घटना 12 जून, 2025 को अहमदाबाद एयरपोर्ट से उड़ान भरने के तुरंत बाद हुई थी।


बोइंग 787 ड्रीमलाइनर, जो लंदन के गैटविक एयरपोर्ट के लिए उड़ान भर रहा था, टेक-ऑफ के केवल 32 सेकंड बाद ही दुर्घटनाग्रस्त हो गया। इस हादसे में विमान में सवार 242 यात्रियों में से 241 और जमीन पर मौजूद 19 लोगों की मृत्यु हो गई।


जांचकर्ता, विमानन विशेषज्ञ और पीड़ितों के परिवार अब भी इस भयानक घटना के कारण का पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं।


जांच की स्थिति

हालांकि, जांचकर्ताओं ने कॉकपिट में हुई घटनाओं का क्रम तो जान लिया है, लेकिन असली कारण अभी भी स्पष्ट नहीं है। अंतिम जांच रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है, जिससे कई सवाल अनसुलझे हैं। क्या यह पायलट की गलती थी, जानबूझकर किया गया कोई काम था, या तकनीकी खराबी थी?


अधिकारियों ने अभी तक क्रैश के कारण के बारे में कोई ठोस जानकारी नहीं दी है। अंतिम रिपोर्ट में देरी हो रही है क्योंकि GE एयरोस्पेस इंजन की जांच में समय लग रहा है।


हादसे की टाइमलाइन

बोइंग 787 ड्रीमलाइनर ने जैसे ही अहमदाबाद के रनवे से उड़ान भरी, महज 32 सेकंड में सब कुछ खत्म हो गया। एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (AAIB) की प्रारंभिक रिपोर्ट के अनुसार:


टेक-ऑफ के तुरंत बाद कॉकपिट में दोनों 'फ्यूल कंट्रोल स्विच' अचानक 'RUN' से 'CUTOFF' पोजिशन पर चले गए।


इस मूवमेंट के कारण इंजनों की ईंधन आपूर्ति तुरंत बंद हो गई और थ्रस्ट तेजी से गिर गया। पायलटों ने स्विच को वापस 'RUN' मोड पर डालने की कोशिश की, लेकिन विमान के पास संभलने का समय नहीं था।


कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर का रहस्य

हादसे की जांच में एक महत्वपूर्ण मोड़ तब आया जब ब्लैक बॉक्स से कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डिंग प्राप्त हुई। दुर्घटनाग्रस्त होने से पहले दोनों पायलटों के बीच हुई बातचीत ने जांचकर्ताओं को उलझन में डाल दिया।


पहला पायलट: 'आपने (फ्यूल) क्यों बंद किया?' दूसरा पायलट: 'मैंने ऐसा नहीं किया!' इसके कुछ ही क्षण बाद एक जोरदार धमाका हुआ और ऑडियो बंद हो गया।


अनसुलझा सवाल

एविएशन विशेषज्ञों का कहना है कि बोइंग 787 ड्रीमलाइनर के फ्यूल कंट्रोल स्विच में एक मजबूत लॉकिंग मैकेनिज्म होता है। इसे गलती से बंद नहीं किया जा सकता।


इस थ्योरी के आधार पर 'पायलट की गलती' या 'आत्मघाती कदम' की आशंका जताई गई, लेकिन AAIB ने ऐसी अटकलों को खारिज कर दिया।


पायलटों का अनुभव

जांच में यह भी सामने आया है कि दोनों पायलट बेहद अनुभवी थे। कैप्टन सुमीत सभरवाल, जिनके पास 15,600 उड़ान घंटे थे, और फर्स्ट ऑफिसर क्लाइव कुंडर, जिनके पास 3,400 घंटे का रिकॉर्ड था।


एक साल बाद भी पीड़ितों के परिवार और पूरा विमानन क्षेत्र अंतिम जांच रिपोर्ट का इंतजार कर रहा है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि उस रात 260 लोगों की जान जाने का असली कारण क्या था।