ऋषिकेश में पेड़ों की सुरक्षा के लिए स्थानीय लोगों का आंदोलन
ऋषिकेश में स्थानीय निवासियों और पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने देहरादून-ऋषिकेश राष्ट्रीय राजमार्ग के चौड़ीकरण के खिलाफ मोर्चा खोला है। वे पेड़ों की कटाई को रोकने के लिए दिन-रात पहरा दे रहे हैं। आंदोलनकारी जलवायु परिवर्तन और पर्यावरणीय नुकसान के बारे में चिंतित हैं। स्थानीय वकील ने इस मुद्दे की गंभीरता को उजागर करते हुए कहा कि यह केवल पेड़ों की कटाई नहीं, बल्कि हमारे स्वास्थ्य और पर्यावरण के लिए भी खतरा है।
Jul 12, 2026, 15:19 IST
ऋषिकेश में सड़क चौड़ीकरण परियोजना का विरोध
उत्तराखंड के ऋषिकेश में, स्थानीय निवासियों और पर्यावरण संरक्षण कार्यकर्ताओं ने भानियावाला और रानीपोखरी के बीच देहरादून-ऋषिकेश राष्ट्रीय राजमार्ग के चौड़ीकरण की योजना के खिलाफ मोर्चा खोला है। इस सड़क परियोजना के तहत काटे जाने वाले पेड़ों की रक्षा के लिए लोग दिन-रात पहरा दे रहे हैं। आंदोलनकारी दृढ़ता से कहते हैं कि वे किसी भी स्थिति में इन पेड़ों को कटने नहीं देंगे।
लोगों की चिंताएं
क्यों भड़के हुए हैं लोग?
इस विरोध प्रदर्शन में शामिल पर्यावरण कार्यकर्ता शिल्पी ने जंगलों की कटाई के संभावित नुकसान पर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा, "हम बड़े पैमाने पर हो रहे जंगलों के विनाश के खिलाफ खड़े हैं। फोर-लेन सड़क बनाने के लिए पेड़ों को काटना उचित नहीं है। ट्रैफिक केवल शहर के भीतर और चारधाम यात्रा के समय होता है, तो क्या इसका मतलब यह है कि वे पूरे पहाड़ को काटकर फोर-लेन बना देंगे?"
उन्होंने आगे कहा, "हम सभी जानते हैं कि तापमान पहले ही 2.5 डिग्री बढ़ चुका है और जलवायु परिवर्तन हमारे सामने है। ऋषिकेश में अब बारिश की मात्रा बहुत कम हो गई है, जिसे स्थानीय लोग महसूस कर रहे हैं। जब कोई पेड़ बहुत पुराना होता है, तो वह केवल एक प्रजाति नहीं बल्कि कई वायरस भी समेटे रहता है। जब हम जंगल काटते हैं, तो केवल पेड़ नहीं मरते, बल्कि कई बीमारियां भी बाहर आती हैं। अमीर लोग गर्मी बढ़ने पर विदेश या अन्य राज्यों में चले जाते हैं, लेकिन हम मध्यम वर्ग और गरीब लोग यहीं रहते हैं। आज ऋषिकेश के हालात ऐसे हो गए हैं कि बिना एसी के रहना मुश्किल है। उत्तराखंड पहले ही 46 हजार हेक्टेयर से ज्यादा जंगल खो चुका है।"
स्थानीय निवासियों का रुख
स्थानीय निवासियों का रुख
स्थानीय लोग इस परियोजना का लगातार विरोध कर रहे हैं और पेड़ों को बचाने के लिए कानूनी लड़ाई भी लड़ रहे हैं। आंदोलन से जुड़े एक स्थानीय वकील एडवोकेट आशुतोष कोठारी ने इस नुकसान की गंभीरता को समझाया है।
उन्होंने बताया, "हम पिछले 5 दिनों से यहां साल के पेड़ों को कटने से बचाने के लिए विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। जो लोग देश छोड़ रहे हैं, वे कहते हैं कि भारत अब सुधर नहीं सकता। लेकिन उत्तराखंड हमारी आखिरी उम्मीद है कि हम कम से कम अपने राज्य को तो सुधार सकें। इन बड़े पेड़ों को मत काटिए जो हमें ऑक्सीजन देते हैं। आपने पेड़ों के ऊपरी हिस्से (कैनोपी) को हटा दिया है, जिससे पूरी धूप सीधे सड़क पर आ रही है और अब गर्मी और बढ़ेगी। हम 15 जुलाई तक का इंतजार कर रहे हैं जब सुप्रीम कोर्ट इस पर अपना आदेश जारी करेगा। हमने कोर्ट की अवमानना की अर्जी भी लगाई है। ये लोग छोटे-छोटे हिस्सों में पेड़ों को काट रहे हैं। मिट्टी नमी सोखती है, और इस मौसम में पेड़ों को काटने से पर्यावरण को बहुत भारी नुकसान हो सकता है।"
विरोध प्रदर्शन की तस्वीरें
#WATCH | Rishikesh, Uttarakhand: Local residents and environmental activists stand guard to protect trees set to be felled for the proposed road-widening project on the Dehradun–Rishikesh National Highway between Bhaniyawala and Ranipokhari. pic.twitter.com/z6dPCNxxem
— News Media (@ANINewsUP) July 12, 2026