×

उमर अब्दुल्ला और पायल का तलाक: सुप्रीम कोर्ट ने दी मंजूरी

सुप्रीम कोर्ट ने जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और उनकी पत्नी पायल के तलाक को मंजूरी दे दी है। दोनों ने आपसी सहमति से अपनी शादी खत्म करने का निर्णय लिया है। यह मामला तब सुप्रीम कोर्ट पहुंचा जब उमर ने दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती दी थी। जानें इस तलाक के पीछे की कहानी और कोर्ट के फैसले के बारे में अधिक जानकारी।
 

सुप्रीम कोर्ट का फैसला

शुक्रवार को, सुप्रीम कोर्ट ने जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और उनकी पत्नी पायल के तलाक को मंजूरी देने का निर्णय लिया। यह निर्णय तब लिया गया जब दोनों ने अदालत को सूचित किया कि वे आपसी सहमति से अपनी शादी समाप्त करने और सभी लंबित विवादों को सुलझाने के लिए तैयार हैं। यह मामला तब सुप्रीम कोर्ट पहुंचा जब उमर ने दिल्ली हाई कोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी, जिसमें उनकी शादी खत्म करने की याचिका खारिज कर दी गई थी। सुनवाई के दौरान, दोनों ने मिलकर एक अर्ज़ी दायर की, जिसमें उन्होंने अपनी शादी खत्म करने की सहमति जताई। इसके साथ ही, उन्होंने एक-दूसरे के खिलाफ दर्ज सभी मामलों को वापस लेने पर भी सहमति व्यक्त की।


शादी का इतिहास

उमर और पायल की शादी 1994 में हुई थी, जब वे दिल्ली के ओबेरॉय होटल में काम कर रहे थे। उनके दो बेटे हैं, ज़हीर और ज़मीर। यह जोड़ा 2009 से अलग रह रहा था, और 2011 में उमर ने पायल से अलग होने की घोषणा की थी, जिससे उनके 17 साल के वैवाहिक रिश्ते का अंत हुआ। इस मामले में, सीनियर एडवोकेट कपिल सिब्बल ने जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की बेंच को बताया कि उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत तलाक के लिए अर्ज़ी दाखिल की थी। जस्टिस नरसिम्हा ने कहा कि अदालत उचित आदेश जारी करेगी।


पिछले कानूनी विवाद

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह जोड़ा पिछले 16 वर्षों से अलग रह रहा है और उनके रिश्ते को समाप्त मान लिया गया है। शुरुआत में, उमर ने क्रूरता के आधार पर तलाक की याचिका दायर की थी, लेकिन 2016 में फैमिली कोर्ट ने उनकी याचिका खारिज कर दी थी। अदालत ने माना कि उमर यह साबित नहीं कर पाए कि शादी पूरी तरह से टूट चुकी है। इसके बाद, उन्होंने फैमिली कोर्ट के फैसले को दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती दी। दिसंबर 2023 में, हाई कोर्ट ने उनकी अपील को खारिज करते हुए फैमिली कोर्ट के आदेश को बरकरार रखा। हाई कोर्ट ने उमर को पायल को हर महीने 1.5 लाख रुपये गुज़ारा भत्ता और अपने एक बेटे की पढ़ाई के लिए 60,000 रुपये देने का निर्देश भी दिया था। अब, जब दोनों पक्ष आपसी समझौते पर पहुँच गए हैं, तो सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि वह इस समझौते के आधार पर मामले का निपटारा करेगा।