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उद्धव ठाकरे का पार्टी नेतृत्व पर बड़ा बयान, चोरों के हाथों में नहीं सौंपेंगे शिवसेना

उद्धव ठाकरे ने शिवसेना के 60वें स्थापना दिवस पर पार्टी के नेतृत्व को लेकर महत्वपूर्ण बयान दिया। उन्होंने कहा कि यदि पार्टी के सदस्य उन्हें उपयुक्त नहीं मानते, तो वह पद छोड़ने के लिए तैयार हैं। ठाकरे ने पार्टी को 'चोरों और लुटेरों' के हाथों में नहीं सौंपने की बात कही। इसके साथ ही, उन्होंने बागी सांसदों की आलोचना की और कांग्रेस में विलय की आशंकाओं को खारिज किया। जानें ठाकरे के इस भावुक संबोधन के पीछे की कहानी और पार्टी की वर्तमान स्थिति।
 

उद्धव ठाकरे का स्पष्ट संदेश

शिवसेना के 60वें स्थापना दिवस पर उद्धव ठाकरे ने कहा कि यदि पार्टी के सदस्य उन्हें नेतृत्व के लिए उपयुक्त नहीं मानते, तो वह पद छोड़ने के लिए तैयार हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जब तक शिव सैनिक उनका समर्थन करते रहेंगे, वह संघर्ष करते रहेंगे। ठाकरे ने चेतावनी दी कि पार्टी को 'चोरों और लुटेरों' के हाथों में नहीं सौंपा जाना चाहिए।


बालासाहेब ठाकरे के कांग्रेस में शामिल न होने के निर्णय का उल्लेख करते हुए, उन्होंने पार्टी की स्वतंत्र पहचान और इसके स्थापना के सिद्धांतों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया।


पार्टी में असहमति और बागी सांसदों की स्थिति

शिवसेना (UBT) के नौ लोकसभा सांसदों में से छह ने पार्टी नेतृत्व के खिलाफ खड़े होकर व्हिप जारी होने के बावजूद मीटिंग्स में भाग नहीं लिया। उन्होंने स्पीकर को पत्र लिखकर अलग ग्रुप का दर्जा मांगा है। इन सांसदों ने कांग्रेस में विलय और विचारधारा से भटकने के डर का हवाला दिया है।


यह स्थिति 2022 में हुई फूट के समान है, और यदि दो-तिहाई समर्थन साबित होता है, तो यह दलबदल विरोधी कानून के दायरे में आ सकता है।


ठाकरे का भावुक संबोधन

ठाकरे ने कहा कि वह एक दशक से अधिक समय से पार्टी का नेतृत्व कर रहे हैं और लगातार हो रहे हमलों के बीच, वह शिवसेना (उबाठा) के शीर्ष पद से हटने के लिए तैयार हैं। उन्होंने मुंबई में आयोजित कार्यक्रम में भावुक होकर कहा, 'अगर पार्टी का कोई सदस्य अगला शिवसेना प्रमुख बनता है, तो मुझे खुशी होगी, लेकिन मैं इसे चोरों के हाथों में नहीं जाने दूंगा।'


उन्होंने यह भी कहा कि वह सभी चुनौतियों का सामना करने के लिए दृढ़ हैं।


बागी सांसदों की आलोचना

ठाकरे ने बागी सांसदों के उन दावों की कड़ी आलोचना की, जिनमें कहा गया था कि उन्हें आशंका है कि शिवसेना (उबाठा) कांग्रेस में विलय कर सकती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि 30 वर्षों तक सहयोगी रहने के बावजूद भाजपा में विलय नहीं किया, तो कांग्रेस में कैसे कर सकते हैं? उन्होंने आशंका जताई कि भाजपा की महाराष्ट्र इकाई (एकनाथ) शिंदे नीत शिवसेना का खुद में विलय कर सकती है।