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उत्तराखंड में नए जिलों के गठन की मांग: समिति ने चेताया आंदोलन की तैयारी

उत्तराखंड में नए जिलों के गठन की मांग को लेकर जिला बनाओ संघर्ष समिति ने अपनी आवाज उठाई है। समिति ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगें पूरी नहीं की गईं, तो वे आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे। संयोजक प्रकाश कुमार डबराल ने कहा कि नए जिलों का गठन विकास, रोजगार और स्थानीय संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए आवश्यक है। समिति ने सरकार से शीघ्र कार्रवाई की अपील की है, अन्यथा आंदोलन तेज करने की चेतावनी दी है।
 

उत्तराखंड में नए जिलों की आवश्यकता


देहरादून: उत्तराखंड में नए जिलों के गठन की मांग को लेकर जिला बनाओ संघर्ष समिति ने अपनी आवाज उठाई है। समिति के सदस्यों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगें पूरी नहीं की गईं, तो उन्हें आंदोलन करने के लिए मजबूर होना पड़ेगा। समिति के संयोजक प्रकाश कुमार डबराल ने कहा कि राज्य में विकास की गति को सुधारने, पलायन को रोकने और बेरोजगारी को कम करने के लिए ग्यारह नए जिलों का गठन आवश्यक है।

डबराल ने बताया कि उत्तराखंड के विभिन्न क्षेत्रों को नए जिलों में विभाजित करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि नए जिलों के अभाव में कई समस्याएं उत्पन्न हो गई हैं, जिनका समाधान करने के लिए सरकार को इस दिशा में गंभीरता से विचार करना चाहिए। इसके लिए एक तेज अभियान चलाने की योजना बनाई जा रही है। समिति का मानना है कि राज्य के दूरदराज के क्षेत्रों में विकास कार्यों का लाभ अंतिम व्यक्ति तक नहीं पहुंच रहा है, जिससे आम जनता को कई समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।

समिति का कहना है कि नए जिलों के गठन से प्रशासनिक कार्यों में तेजी आएगी और शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, और न्याय जैसी सुविधाएं आम जनता तक बेहतर तरीके से पहुंच सकेंगी। इसके साथ ही, स्थानीय संस्कृति और परंपराओं को भी बढ़ावा मिलेगा। प्रस्तावित नए जिलों में उत्तरकाशी से पुरोला, नौगांव, मोरी क्षेत्र, टिहरी से नरेंद्र नगर, प्रतापनगर, पौड़ी से कोटद्वार, बीरोंखाल, चमोली से गैरसैंण, नैनीताल से हल्द्वानी, रामनगर, हरिद्वार से रुड़की, देहरादून से विकासनगर, चकराता, अल्मोड़ा से रानीखेत, पिथौरागढ़ से डीडीहाट, और उधमसिंहनगर से काशीपुर, गदरपुर, बाजपुर क्षेत्र शामिल हैं।

डबराल ने यह भी कहा कि नए जिलों के गठन से युवाओं को रोजगार के अधिक अवसर मिलेंगे और महिलाओं का सशक्तिकरण भी होगा। इसके अलावा, भ्रष्टाचार पर नियंत्रण लगेगा और आपदा के समय राहत कार्य तेजी से किए जा सकेंगे। समिति ने उत्तराखंड सरकार से आग्रह किया है कि नए जिलों के गठन की प्रक्रिया को जल्द से जल्द शुरू किया जाए। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों की अनदेखी की गई, तो समिति आंदोलन को तेज करने के लिए मजबूर होगी.