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उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने बाईपास निर्माण पर जनहित याचिका पर सुनवाई की

उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने रुद्रप्रयाग जिले के कुंड में चल रहे बाईपास निर्माण पर जनहित याचिका की सुनवाई की। अदालत ने जिलाधिकारी और कार्यकारी संस्था को एक सप्ताह में जवाब देने का निर्देश दिया। याचिका में पत्थर गिरने और मलबे के निस्तारण को लेकर चिंता जताई गई है। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि सुरक्षा उपायों की कमी के कारण स्थानीय निवासियों की सुरक्षा खतरे में है। उच्च न्यायालय ने कार्यकारी एजेंसी को ग्रामीणों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक निर्देश देने की मांग की है।
 

बाईपास निर्माण पर उच्च न्यायालय की सुनवाई

उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने रुद्रप्रयाग जिले के कुंड में चल रहे बाईपास निर्माण से संबंधित एक जनहित याचिका की सुनवाई की। अदालत ने रुद्रप्रयाग के जिलाधिकारी और निर्माण कार्य में संलग्न कार्यकारी संस्था को एक सप्ताह के भीतर जवाब प्रस्तुत करने का आदेश दिया।


इस याचिका में सैमी धसारी गांव के आसपास और चार धाम यात्रा मार्ग पर केदारनाथ राजमार्ग पर पत्थर गिरने और निर्माण से उत्पन्न मलबे को मंदाकिनी नदी में फेंकने की चिंता जताई गई है। मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश जी नरेंद्र और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की पीठ ने की।


पीठ ने जिलाधिकारी और कार्यकारी एजेंसी को निर्देश दिया कि वे एक सप्ताह के भीतर अपना उत्तर प्रस्तुत करें। याचिका में मदन सिंह बिष्ट, जो सैमी धसारी गांव के निवासी हैं, ने कहा कि बाईपास निर्माण के कारण गांव के पास और केदारनाथ राजमार्ग पर पत्थर गिर रहे हैं। इसके साथ ही, निर्माण कार्य से निकलने वाला मलबा मंदाकिनी नदी में बहाया जा रहा है।


याचिकाकर्ता ने यह भी आरोप लगाया कि कार्यकारी एजेंसी ने सुरक्षा उपायों को लागू नहीं किया है और मलबे के निस्तारण के लिए कोई डंपिंग जोन नहीं बनाया गया है।


याचिका में यह भी कहा गया है कि निर्माण कार्य के दौरान लगातार मलबा गिरने से केदारनाथ राजमार्ग और स्थानीय निवासियों की सुरक्षा को गंभीर खतरा उत्पन्न हो गया है। उच्च न्यायालय से अनुरोध किया गया है कि वह कार्यकारी एजेंसी को ग्रामीणों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक निर्देश जारी करे।