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उत्तरकाशी में हिमस्खलन: लापता पर्वतारोहियों में से दो शव मिले, छह की खोज जारी

उत्तरकाशी में केदारताल की पहाड़ियों पर हुए हिमस्खलन के बाद लापता आठ पर्वतारोहियों में से दो के शव बरामद कर लिए गए हैं। अन्य छह की खोज जारी है। घटना के बाद बचाव दल ने अभियान तेज कर दिया है। जानें इस घटना के बारे में और क्या जानकारी मिली है।
 

उत्तरकाशी में हिमस्खलन की घटना


उत्तरकाशी, उत्तराखंड में केदारताल की दुर्गम पहाड़ियों पर हाल ही में हुए भयंकर हिमस्खलन के बाद लापता हुए आठ पर्वतारोहियों में से दो के शव मंगलवार को बचाव दल द्वारा बरामद किए गए। मृतकों की पहचान अभी तक नहीं हो पाई है। इस घटना के बाद से अन्य छह लापता लोगों की खोज के लिए अभियान जारी है।


29 अक्टूबर को केदारताल के ऊंचाई वाले ट्रैक पर भारी हिमस्खलन हुआ था, जिसके कारण आठ सदस्यीय पर्वतारोहण दल के सभी सदस्यों का संपर्क टूट गया था।


जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी शार्दूल गुसाईं ने बताया कि राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (एसडीआरएफ) और नेहरू पर्वतारोहण संस्थान (एनआईएम) की संयुक्त टीम ने केदार खरक के आसपास तलाशी अभियान के दौरान दो शवों को खोज निकाला।


बचाव दल ने सैटेलाइट फोन के माध्यम से प्रशासन को इसकी सूचना दी। बरामद किए गए शवों में एक पुरुष और एक महिला शामिल हैं, लेकिन उनकी पहचान अभी तक स्पष्ट नहीं हो पाई है।


गुसाईं के अनुसार, मंगलवार को दोपहर करीब तीन बजे तक तलाशी अभियान चलाया गया। इसके बाद बचाव दल ने दिनभर का अभियान समाप्त कर केदार खरक स्थित अपने आधार शिविर में लौट आए। बुधवार को एक बार फिर लापता लोगों की खोज शुरू की जाएगी।


बचाव कार्य को अधिक व्यवस्थित और प्रभावी बनाने के लिए घटनास्थल के निकट एक वैकल्पिक हेलीपैड भी तैयार किया गया है, ताकि जरूरत पड़ने पर राहत और बचाव दल को प्रभावित क्षेत्र तक आसानी से पहुंचाया जा सके।


अधिकारियों के अनुसार, संयुक्त बचाव दल को केदार खरक के आसपास कुछ टेंट और उपकरणों से भरे बैग भी मिले हैं। केदार खरक इस ट्रैक मार्ग पर स्थित दूसरा प्रमुख पड़ाव है, जो समुद्र तल से लगभग 4,000 मीटर की ऊंचाई पर है।


इससे पहले सोमवार को एसडीआरएफ और एनआईएम के 10 सदस्यों वाली संयुक्त टीम को हेलीकॉप्टर के माध्यम से केदार खरक पहुंचाया गया था। इसके बाद से ही टीम ने दुर्गम पहाड़ी क्षेत्र में लापता पर्वतारोहियों की तलाश शुरू कर दी थी।


लापता हुए आठ लोगों के समूह में पश्चिम बंगाल के पांच पुरुष पर्वतारोही, उत्तर प्रदेश की दो महिला पर्वतारोही और उत्तरकाशी का एक स्थानीय गाइड शामिल था। यह पूरा दल केदारताल की यात्रा पर निकला था।


29 अक्टूबर को जब पर्वतारोहण दल ग्लेशियर से बनी केदारताल झील से नीचे उतर रहा था, तभी केदार खरक के निकट अचानक भारी हिमस्खलन हुआ। बर्फ का विशाल हिस्सा खिसककर नीचे आने से पूरा इलाका प्रभावित हो गया और दल के आठ सदस्यों का संपर्क बाकी लोगों से टूट गया।


केदारताल झील समुद्र तल से लगभग 15,485 फीट यानी 4,720 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। यह झील थलाय सागर, भृगुपंथ और जोगिन पर्वत चोटियों से पिघलकर आने वाली बर्फ के पानी से पोषित होती है।


प्राकृतिक सुंदरता और दुर्गम पर्वतीय परिस्थितियों के कारण यह स्थान अनुभवी पर्वतारोहियों और ऊंचाई वाले इलाकों में ट्रेकिंग करने वाले लोगों के बीच काफी लोकप्रिय है। हालांकि, यहां तक पहुंचने का रास्ता बेहद चुनौतीपूर्ण माना जाता है और इस मार्ग पर मौसम तथा भौगोलिक परिस्थितियां लगातार जोखिम पैदा करती हैं।


गंगोत्री से शुरू होने वाला केदारताल ट्रेक लगभग 18 किलोमीटर लंबा है। इस रास्ते में केदार गंगा नदी के किनारे बेहद खड़ी चढ़ाई से गुजरना पड़ता है। यात्रा के दौरान पर्वतारोहियों को घने भोजपत्र के जंगलों, ऊंचाई पर स्थित हरे-भरे घास के मैदानों और अस्थिर मोरेन क्षेत्रों से होकर आगे बढ़ना पड़ता है।


इन इलाकों में बर्फ, चट्टानों और ढीली मिट्टी की वजह से रास्ता काफी संवेदनशील रहता है। ऐसे में मौसम में अचानक बदलाव या हिमस्खलन जैसी घटनाएं पर्वतारोहियों के लिए गंभीर खतरा बन सकती हैं।


जानकारी के अनुसार, इस अभियान में कुल 12 लोग शामिल थे। इनमें सात पर्वतारोही और पांच सहायक कर्मचारी थे। यह दल 27 अक्टूबर को गंगोत्री से अपनी यात्रा पर रवाना हुआ था और इसे 29 अक्टूबर तक अपना निर्धारित ट्रेक पूरा करना था। हालांकि, इसी दौरान हुए हिमस्खलन ने अभियान को भीषण हादसे में बदल दिया।


घटना के बाद आठ लोगों से संपर्क नहीं हो पाया, जबकि दल के चार सहायक कर्मचारी किसी तरह सुरक्षित वापस गंगोत्री पहुंचने में सफल रहे।


बताया गया कि 30 अक्टूबर को चारों सहायक कर्मचारी हिमस्खलन के बाद किसी तरह रास्ता तय करते हुए गंगोत्री लौटे। इसी दौरान उन्होंने बाकी आठ सदस्यों से संपर्क टूटने की जानकारी दी, जिसके बाद प्रशासन को घटना की सूचना दी गई।


जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी शार्दूल गुसाईं ने बताया कि ट्रेकिंग का संचालन करने वाली संस्था सोल सीकर की ओर से जानकारी मिलते ही बचाव दलों को तत्काल सक्रिय कर दिया गया था। इसके बाद प्रभावित क्षेत्र में लापता लोगों को खोजने के लिए अभियान शुरू किया गया।


वहीं, एसडीआरएफ के कमांडेंट अर्पण यदुवंशी ने बताया कि क्षेत्र में खराब मौसम के कारण तलाशी और बचाव अभियान चलाने में लगातार परेशानियां आ रही हैं। ऊंचाई वाले दुर्गम पहाड़ी इलाके में मौसम का मिजाज बार-बार बदल रहा है, जिससे बचाव दलों की आवाजाही और तलाशी कार्य प्रभावित हो रहे हैं। इसके बावजूद टीमें लगातार लापता छह लोगों की तलाश में जुटी हुई हैं। मंगलवार को दो शव मिलने के बाद अब बचाव अभियान और अधिक सतर्कता के साथ आगे बढ़ाया जाएगा।