उत्तर प्रदेश में मानसून की बारिश में कमी, कृषि पर असर की आशंका
उत्तर प्रदेश में बारिश की स्थिति
लखनऊ, 30 जुलाई: उत्तर प्रदेश में इस वर्ष दक्षिण-पश्चिम मानसून के दौरान अब तक सामान्य से 25 प्रतिशत कम वर्षा हुई है। मौसम विभाग ने अगस्त की शुरुआत में मानसून के फिर से सक्रिय होने की संभावना जताई है, लेकिन वर्षा पर निर्भर क्षेत्रों में मिट्टी की नमी और बुआई की स्थिति को लेकर चिंता बढ़ गई है। भारत मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार, 1 जून से 29 जुलाई के बीच राज्य में 258.6 मिलीमीटर बारिश हुई, जबकि इस अवधि में सामान्य बारिश 342.8 मिलीमीटर होनी चाहिए थी।
पूर्वी उत्तर प्रदेश में बारिश की कमी
इस प्रकार, राज्य में सामान्य से 25 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज की गई है। पूर्वी उत्तर प्रदेश में इस दौरान सबसे कम 252.8 मिलीमीटर बारिश हुई, जबकि सामान्य बारिश 370.4 मिलीमीटर होती है। इस क्षेत्र में वर्षा में 32 प्रतिशत की कमी आई है। भदोही, देवरिया, जौनपुर, कानपुर देहात, कौशांबी, कुशीनगर, रायबरेली, संत कबीर नगर और सीतापुर जैसे कई जिलों में बारिश की कमी 50 प्रतिशत से अधिक रही है, जो पूर्वी उत्तर प्रदेश के बड़े हिस्से में लंबे समय से शुष्क स्थिति का संकेत है।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश की स्थिति
वहीं, पश्चिमी उत्तर प्रदेश में स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर रही है, जहां सामान्य 304.2 मिलीमीटर बारिश के मुकाबले 267 मिलीमीटर बारिश हुई। इस प्रकार, यहां बारिश में 12 प्रतिशत की कमी आई है। हालांकि, बारिश का वितरण समान नहीं रहा। मेरठ, मुजफ्फरनगर और संभल में मानसून के दौरान अत्यधिक वर्षा हुई, जबकि गौतम बुद्ध नगर, पीलीभीत, शामली और अमरोहा में लगातार कम बारिश दर्ज की गई।
कृषि पर प्रभाव
कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि उत्तर प्रदेश में धान की रोपाई और मक्का, दलहन तथा तिलहन जैसी फसलों की बुआई के लिए जुलाई का महीना महत्वपूर्ण होता है। कृषि विज्ञान केंद्र के प्रभारी रामेन्द्र कुशवाहा ने बताया कि बारिश में कमी, विशेषकर पूर्वी उत्तर प्रदेश में, फसलों की वृद्धि को प्रभावित कर सकती है, क्योंकि इस क्षेत्र में खेती का बड़ा हिस्सा वर्षा पर निर्भर है। इससे सिंचाई पर निर्भरता और किसानों की लागत बढ़ सकती है। हालांकि, मौसम विभाग ने कहा है कि अगस्त के पहले सप्ताह में मानसून के फिर सक्रिय होने की संभावना है।
मौसम प्रणाली की गतिविधियां
उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी के ऊपर बने गहरे दबाव के क्षेत्र ने मध्य छत्तीसगढ़ और ओडिशा के अंदरूनी हिस्सों की ओर बढ़ना शुरू किया है, जिससे मध्य भारत में मानसून की गतिविधियां तेज हो रही हैं। मौसम विज्ञान ने कहा है कि इस मौसम प्रणाली के कमजोर पड़ने के बाद मानसून के उत्तर की ओर बढ़ने की संभावना है, जिससे अगस्त के शुरुआती दिनों में पूरे राज्य में इसकी गतिविधियां फिर से तेज हो सकती हैं। बारिश में कमी के बावजूद इस सप्ताह के अंत तक तापमान में अधिक वृद्धि होने की संभावना नहीं है, क्योंकि तेज हवाएं चलने से तापमान नियंत्रित रहेगा।