उत्तर प्रदेश में महिलाओं के खिलाफ अपराधों में गिरावट: एनसीआरबी रिपोर्ट का विश्लेषण
महिलाओं के खिलाफ अपराधों में कमी का संकेत
लखनऊ। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) द्वारा जारी की गई नई रिपोर्ट ने उत्तर प्रदेश पुलिस और न्यायिक प्रणाली की प्रतिष्ठा को मजबूत किया है। 2024 में राज्य में महिलाओं के खिलाफ अपराध, डकैती, लूट और चोरी जैसे गंभीर अपराधों में उल्लेखनीय कमी आई है। तीन वर्षों के तुलनात्मक आंकड़े कानून-व्यवस्था में सुधार की स्पष्ट तस्वीर पेश करते हैं।
अपहरण और दुष्कर्म के मामलों में कमी
रिपोर्ट के अनुसार, अपहरण के मामलों में उल्लेखनीय कमी आई है। 2023 में 14,272 मामले दर्ज किए गए थे, जो 2024 में घटकर 5,306 रह गए, जो 62.8 प्रतिशत की कमी दर्शाता है। 2022 की तुलना में यह गिरावट 64.4 प्रतिशत तक पहुंच गई है। दुष्कर्म के मामलों में भी कमी आई है; 2023 में 3,516 मामलों की तुलना में 2024 में यह संख्या 3,209 रही। इसी तरह, महिलाओं की हत्या के मामलों में 4.8 प्रतिशत की कमी आई, जिससे संख्या 702 से घटकर 668 हो गई।
एंटी रोमियो अभियान का सकारात्मक प्रभाव
महिलाओं के खिलाफ हमलों और छेड़छाड़ के मामलों में भी अप्रत्याशित गिरावट देखी गई है। 2023 में 9,453 मामले सामने आए थे, जो 2024 में घटकर 4,418 रह गए। एनसीआरबी के आंकड़ों में राज्य सरकार के ‘एंटी रोमियो स्क्वाड’ अभियान का सकारात्मक प्रभाव स्पष्ट है। 2023 में छेड़छाड़ के 2,175 मामले दर्ज हुए थे, जबकि 2024 में यह संख्या बढ़कर 4,418 हो गई, जो पुलिस की बेहतर कार्यप्रणाली और पीड़िताओं की जागरूकता को दर्शाता है। हालांकि, घरेलू उत्पीड़न के मामलों में मामूली वृद्धि हुई है, जिसमें 2024 में 21,266 मामले दर्ज किए गए।
दोषसिद्धि दर में उत्तर प्रदेश की बढ़त
केवल अपराधों की रिपोर्टिंग ही नहीं, बल्कि दोषियों को सजा दिलाने में भी उत्तर प्रदेश ने राष्ट्रीय स्तर पर सफलता हासिल की है। 2024 में महिलाओं के खिलाफ अपराधों में राज्य की दोषसिद्धि दर (कन्विक्शन रेट) 76.6 प्रतिशत रही। कुल 3,52,664 लंबित मामलों में से 27,639 मामलों की सुनवाई पूरी हुई, जिनमें से 21,169 मामलों में अदालत ने आरोपियों को दोषी ठहराया। राज्य ने कुल 27,743 मामलों का निपटारा किया, जो पूरे देश में सबसे अधिक है।
इसके विपरीत, पश्चिम बंगाल की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है, जहां महिलाओं के खिलाफ अपराधों में दोषसिद्धि दर केवल 1.6 प्रतिशत है। अन्य राज्यों में मिजोरम 87.8% के साथ शीर्ष पर है, जबकि कर्नाटक (4.8%), महाराष्ट्र (8.7%), तेलंगाना (14.8%), केरल (17%), पंजाब (19%), तमिलनाडु (23.4%), मध्य प्रदेश (29.6%) और राजस्थान (37.2%) जैसे राज्य पीछे हैं।
लंबित मामलों की समस्या बनी हुई है
हालांकि पुलिस और न्यायपालिका का प्रदर्शन बेहतर हुआ है, लेकिन लंबित मामलों की संख्या अब भी एक बड़ी चुनौती है। उत्तर प्रदेश में महिलाओं के खिलाफ अपराधों के 92.1 प्रतिशत मामले अभी भी अदालतों में लंबित हैं। बंगाल में यह दर 96.6 प्रतिशत, बिहार में 97.9 प्रतिशत और महाराष्ट्र में 95.4 प्रतिशत है, जो देश भर में त्वरित न्याय की राह में मौजूद बाधाओं को दर्शाता है।