उत्तर प्रदेश में बुद्ध पूर्णिमा पर सियासी घमासान: अखिलेश यादव और केशव मौर्य के बीच तीखी नोकझोंक
सियासी विवाद की शुरुआत
उत्तर प्रदेश की राजनीतिक परिदृश्य में त्योहारों और धार्मिक अवसरों का उपयोग अब शक्ति प्रदर्शन और तीखे हमलों के लिए किया जाने लगा है। बुद्ध पूर्णिमा के अवसर पर कुशीनगर के महापरिनिर्वाण मंदिर से शुरू हुआ यह घटनाक्रम अब एक बड़े सियासी विवाद में बदल चुका है। इस विवाद की जड़ में प्रदेश के दोनों उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक का एक साझा वीडियो है, जिस पर समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव ने तीखा हमला किया है.
अखिलेश यादव का तीखा हमला
जैसे ही दोनों उपमुख्यमंत्री ने मंदिर परिसर से अपनी एकजुटता का वीडियो साझा किया, अखिलेश यादव ने तुरंत प्रतिक्रिया दी। उन्होंने भाजपा नेताओं को 'अधर्मी' और 'असत्य का मार्ग' चुनने वाला बताया। अखिलेश ने कहा कि धार्मिक स्थलों की एक मर्यादा होती है, जिसे भाजपा नेता अपनी नकारात्मक राजनीति से भंग कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि ईश्वर को पीठ दिखाना पाप है। इसके अलावा, उन्होंने भाजपा के भीतर की गुटबाजी पर चुटकी लेते हुए कहा कि 'दोनों दिखाने को तो साथ हैं, लेकिन जो मुख्य हैं (मुख्यमंत्री) वो कहाँ हैं?'
केशव मौर्य का जवाब
डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने इस हमले का जवाब देने में देर नहीं की। उन्होंने अखिलेश को सीधे संबोधित करते हुए कहा कि एक 'हिट और फिट' जोड़ी को देखकर घबराना स्वाभाविक है। मौर्य ने खुद को चक्रवर्ती सम्राट चंद्रगुप्त मौर्य का वंशज बताते हुए अपनी विरासत को भगवान बुद्ध की शांति और न्याय की सीख से जोड़ा। उन्होंने पलटवार करते हुए आरोप लगाया कि सपा के संरक्षण में मौर्य, कुशवाहा, शाक्य और सैनी समाज पर अत्याचार हुए हैं। मौर्य ने स्पष्ट किया कि जनता इन अन्यायों का हिसाब आने वाले समय में 'कमल' खिलाकर करेगी।
राजनीतिक तापमान में वृद्धि
यह विवाद केवल एक ट्वीट तक सीमित नहीं है। यह आगामी चुनावों से पहले पिछड़े वर्गों के वोटों पर कब्जा करने और पार्टी के भीतर एकता दिखाने की एक सोची-समझी रणनीति है। जहां विपक्ष एकजुटता पर सवाल उठा रहा है, वहीं सरकार अपनी 'डबल इंजन' वाली ताकत का प्रदर्शन कर रही है.