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उत्तर प्रदेश में जापानी बुखार पर नियंत्रण: गोरखपुर मॉडल की सफलता

उत्तर प्रदेश में स्वास्थ्य विभाग ने जापानी बुखार और एईएस पर नियंत्रण पाने में महत्वपूर्ण सफलता हासिल की है। गोरखपुर मॉडल के तहत जागरूकता, समय पर जांच और उपचार के कारण इस साल अब तक एक भी बच्चा नहीं मरा है। 2017 से पहले इन बीमारियों से होने वाली मौतों में कमी आई है। जानें कैसे स्वास्थ्य विभाग ने विशेष रणनीतियों के माध्यम से इन बीमारियों पर नियंत्रण पाया है और गोरखपुर मॉडल को अन्य क्षेत्रों में लागू किया जा रहा है।
 

गोरखपुर में स्वास्थ्य विभाग की उपलब्धियां

गोरखपुर समाचार: उत्तर प्रदेश में जापानी इंसेफेलाइटिस और एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम पर स्वास्थ्य विभाग ने महत्वपूर्ण सफलता हासिल की है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, इस वर्ष अब तक इन बीमारियों से एक भी बच्चे की मृत्यु नहीं हुई है। गोरखपुर मॉडल के तहत जागरूकता, समय पर जांच और उपचार के कारण मरीजों की संख्या और मृत्यु दर में उल्लेखनीय कमी आई है। प्रदेश में इन बीमारियों पर नियंत्रण पाने का दावा किया जा रहा है।



यूपी के स्वास्थ्य विभाग ने जापानी एन्सेफलाइटिस और एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम पर नियंत्रण पाने का दावा किया है। इस साल अब तक इन बीमारियों से कोई भी मौत नहीं हुई है। कुछ मरीज बीमार हुए हैं, लेकिन समय पर उपचार मिलने से वे ठीक हो गए हैं। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि 2017 तक JE और AES से बड़ी संख्या में मौतें होती थीं, लेकिन राष्ट्रीय वेक्टर बॉर्न डिजीज नियंत्रण कार्यक्रम के माध्यम से इन पर नियंत्रण पाने का प्रयास किया गया है।


2017 में हुईं अधिकतम मौतें

साल 2017 से पहले AES का सीएफआर 13.9 प्रतिशत और JE का सीएफआर 13.4 प्रतिशत था, लेकिन जागरूकता अभियान और समय पर उपचार के कारण इन बीमारियों पर 95 प्रतिशत तक नियंत्रण पाया गया है। 2003 में इन बीमारियों से 300 मरीज मिले थे और सीएफआर 0.6 प्रतिशत था, जबकि 2025 में यह संख्या लगभग 150 रह गई थी। इस साल केवल तीन मामले सामने आए हैं और दोनों बीमारियों का सीएफआर शून्य हो गया है।


गोरखपुर मॉडल की रणनीतियाँ

स्वास्थ्य विभाग ने गोरखपुर मॉडल को न केवल अन्य मंडलों में लागू किया है, बल्कि दस्तक अभियान में कुष्ठ रोग, मलेरिया, टीवी जैसी अन्य बीमारियों को भी शामिल किया है। गोरखपुर मंडल और पूर्वांचल के कई जिलों में इन बीमारियों का अधिक प्रभाव था, जिसके बाद विशेष रणनीतियाँ लागू की गईं।


टीमों का गठन और प्रशिक्षण

स्वास्थ्य विभाग ने नगर निगम, पंचायत, पशुपालन विभाग सहित 12 विभागों की संयुक्त टीम बनाई है और प्रत्येक विभाग को अलग-अलग जिम्मेदारियाँ दी गई हैं। JE और AES के मरीजों को सीधे गोरखपुर बीआरडी मेडिकल कॉलेज भेजा जाता था, जिससे वहां मरीजों का दबाव बढ़ जाता था।


स्वास्थ्य विभाग ने स्कूलों में शिक्षकों को स्वास्थ्य संरचना के रूप में प्रशिक्षित किया है ताकि किसी बच्चे को बुखार आने पर उसे तुरंत अस्पताल भेजा जा सके। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर इंसेफेलाइटिस ट्रीटमेंट सेंटर और PICU की व्यवस्था की गई है, जिसके परिणामस्वरूप मरीजों की संख्या में कमी आई है और मौतें शून्य हो गई हैं।


संक्रामक रोग नियंत्रण अभियान

संक्रामक रोग नियंत्रण अभियान के अधिकारी डॉक्टर विकास शेदु अग्रवाल ने बताया कि उनका लक्ष्य सभी संक्रामक रोगों का सीएफआर शून्य करना है। पूरे प्रदेश में संचारी रोग नियंत्रण अभियान शुरू किया गया है, जिसमें टीबी, मलेरिया, कुष्ठ रोग जैसी बीमारियों को भी शामिल किया गया है। जापानी एन्सेफलाइटिस एक गंभीर वायरल बीमारी है, जो संक्रमित मच्छरों के काटने से फैलती है और यह दिमाग पर असर डालती है।