उत्तर प्रदेश में जानवरों के अजीब व्यवहार के पीछे की सच्चाई
जानवरों के अजीब वीडियो की चर्चा
इन दिनों उत्तर प्रदेश में जानवरों से जुड़े दो वीडियो सोशल मीडिया पर काफी चर्चा का विषय बने हुए हैं। पहले बिजनौर का एक कुत्ता है, जो घंटों तक हनुमान मंदिर के चारों ओर घूमता नजर आया। इसके बाद श्रावस्ती जिले में एक गाय का वीडियो वायरल हुआ, जिसमें वह कई दिनों से खेत के चारों ओर चक्कर लगा रही है। इन दोनों घटनाओं को कुछ लोग चमत्कार मान रहे हैं, जबकि पशु विशेषज्ञों का कहना है कि इसके पीछे चिकित्सकीय कारण हो सकते हैं।
बिजनौर का कुत्ता और उसकी बीमारी
बिजनौर के नगीना क्षेत्र के नंदपुर खुर्द गांव में एक आवारा कुत्ता हनुमान जी और दुर्गा माता की मूर्तियों की परिक्रमा करता दिखाई दिया। यह वीडियो तेजी से वायरल हो गया और गांव के लोग इसे 'भैरव बाबा' का रूप मानने लगे। लोग उसे प्रसाद और हलवा खिलाने लगे। लेकिन बाद में पता चला कि कुत्ता एक गंभीर बीमारी से पीड़ित था।
पशु चिकित्सकों ने बताया कि कुत्ते को 'एनाप्लाज्मा' नामक टिक-जनित बीमारी थी, जिसने उसके तंत्रिका तंत्र को प्रभावित किया था। इस वजह से वह लगातार गोल-गोल घूम रहा था। इलाज के बाद उसकी स्थिति में सुधार हुआ और वह सामान्य व्यवहार करने लगा।
श्रावस्ती में गाय का चक्कर लगाना
श्रावस्ती जिले के ग्राम बसभरिया पुरैना में एक गाय का वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें वह खेत के चारों ओर चक्कर लगाती नजर आ रही है। कुछ लोग इसे भगवान का चमत्कार मान रहे हैं, जबकि अन्य इसे बीमारी का संकेत मानते हैं। वीडियो में देखा जा सकता है कि लोग गाय को चुनरी पहनाकर चंदन का टिका भी लगा रहे हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि केवल वीडियो देखकर किसी जानवर की बीमारी का पता नहीं लगाया जा सकता। पशुओं में कई न्यूरोलॉजिकल बीमारियां होती हैं, जो उन्हें चक्कर लगाने और सामान्य गतिविधियों से रोक सकती हैं।
गाय की संभावित बीमारी
एक संभावित बीमारी लिस्टेरियोसिस है, जो 'लिस्टेरिया मोनोसाइटोजेन्स' बैक्टीरिया से होती है। यह आमतौर पर संक्रमित चारा खाने से फैलती है। इसके लक्षणों में सिर झुकाना, चक्कर आना और तंत्रिका तंत्र से जुड़ी समस्याएं शामिल हो सकती हैं।
हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि बिना चिकित्सकीय जांच के यह नहीं कहा जा सकता कि गाय को लिस्टेरियोसिस है। इसके पीछे कोई अन्य बीमारी भी हो सकती है। इसलिए किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले पशु चिकित्सक द्वारा जांच आवश्यक है।
चिकित्सा सहायता की आवश्यकता
पशु चिकित्सकों का मानना है कि ऐसी स्थितियों में पूजा-पाठ या अंधविश्वास की बजाय तुरंत चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए। कई पशु रोग समय पर इलाज मिलने पर पूरी तरह ठीक हो सकते हैं। बिजनौर के कुत्ते का मामला इसका उदाहरण है, जहां लोगों ने पहले उसे चमत्कार माना, लेकिन बाद में पता चला कि वह एक बीमारी से जूझ रहा था।