उत्तर प्रदेश की राजनीति में कांशीराम को भारत रत्न देने की मांग पर विपक्ष का एकजुटता
कांशीराम को भारत रत्न देने की मांग
लखनऊ/नई दिल्ली, 17 मार्च 2026: उत्तर प्रदेश की राजनीतिक स्थिति में एक महत्वपूर्ण बदलाव आया है। समाजवादी पार्टी के अखिलेश यादव, बहुजन समाज पार्टी की मायावती और कांग्रेस के राहुल गांधी ने मिलकर बसपा के संस्थापक मान्यवर कांशीराम को भारत रत्न देने की मांग की है। कांशीराम की 93वीं जयंती (15 मार्च 2026) के अवसर पर राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री मोदी को पत्र लिखा, जबकि मायावती ने इस मुद्दे को लंबे समय से उठाया है। अब अखिलेश यादव ने भी इस मांग का समर्थन किया है। यह एकजुटता 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले दलित वोट बैंक पर बड़ा दांव माना जा रहा है, जहां दलित वोट (लगभग 21%) सभी पार्टियों के लिए महत्वपूर्ण है!
राहुल गांधी की मांग राहुल गांधी ने लखनऊ में कांग्रेस के 'संविधान सम्मेलन' में भाग लिया और कांशीराम को "सामाजिक न्याय के महान योद्धा" बताया। उन्होंने पीएम मोदी को पत्र में लिखा:
- "मैं मांग करता हूं कि भारत सरकार आदरणीय कांशीराम जी को भारत रत्न से सम्मानित करे। उन्होंने बहुजन समाज को अधिकार और आत्मसम्मान का रास्ता दिखाया।"
- राहुल ने कहा कि यदि कांशीराम नेहरू जी के समय में होते, तो वे कांग्रेस के मुख्यमंत्री बनते। कांग्रेस ने भी इस मांग को दोहराते हुए नया नारा दिया: "कांशीराम का मिशन अधूरा, राहुल गांधी करेंगे पूरा!"
मायावती का रुख मायावती ने 2008 से कांशीराम को भारत रत्न देने की मांग की है। जयंती पर लखनऊ में श्रद्धांजलि सभा में उन्होंने कहा:
- "केंद्र सरकार को विलंब नहीं करना चाहिए, कांशीराम को भारत रत्न दिया जाना चाहिए।"
- हालांकि, राहुल की मांग पर मायावती ने कांग्रेस पर आरोप लगाया: "कांग्रेस ने अम्बेडकर को भी भारत रत्न नहीं दिया, ये सब वोट बैंक की राजनीति है!"
अखिलेश यादव का समर्थन अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पर कहा:
- "कांशीराम जी और समाजवादी पार्टी ने मिलकर देश को दिशा दी थी। उन्हें भारत रत्न मिलना चाहिए।"
- अखिलेश ने मायावती के सुर में सुर मिलाया, लेकिन मायावती ने पलटवार करते हुए पूछा: "अगर सम्मान था, तो कांशीराम के नाम पर जिले का नाम कासगंज क्यों बदला?"
2027 चुनाव का महत्व
- 2027 के यूपी चुनाव में दलित वोट महत्वपूर्ण है। BSP का वोट बैंक कमजोर हुआ है, कांग्रेस और SP इसे टारगेट कर रहे हैं।
- राहुल की मांग से कांग्रेस दलितों में पैठ बनाने की कोशिश कर रही है, जबकि अखिलेश PDA (पिछड़े, दलित, अल्पसंख्यक) फॉर्मूले को मजबूत कर रहे हैं।
- मायावती के लिए यह चुनौती है, क्योंकि उनका कोर वोट बैंक कांशीराम की विरासत पर निर्भर है।
- BJP पर दबाव: यदि कांशीराम को सम्मान नहीं दिया गया, तो "दलित विरोधी" का आरोप लगेगा। योगी आदित्यनाथ ने भी कांशीराम को श्रद्धांजलि दी, लेकिन भारत रत्न पर चुप्पी साधी है।
केंद्र का रुख मोदी सरकार ने अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। भारत रत्न पोस्टह्यूमस दिया जा सकता है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मांग 2027 चुनाव तक गूंजती रहेगी और दलित राजनीति को नया मोड़ देगी।
ब्रेकिंग: अखिलेश, मायावती और राहुल एकजुट! कांशीराम को भारत रत्न की मांग पर केंद्र को लताड़ – यूपी में 2027 से पहले विपक्ष का बड़ा दांव! क्या मोदी सरकार इस पर ध्यान देगी? राजनीति गरमा गई है!